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35 साल से हर घर में नल कनेक्शन गर्मी में भी मिलता है भरपूर पानी

3 वर्ष पहले
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जलसंकट से बचने के लिए ग्राम धाराखेड़ी के ग्रामीणों का वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम इतना मजबूत है कि भीषण गर्मी के दौर में भी यहां के लोगों को पानी के लिए भटकने की जरूरत नहीं है। हर घर में नलों से पानी सप्लाई होता है। खास बात यह है कि गांव में यह व्यवस्था 35 साल पहले 1982 से चल रही है। बेहतर मैनेजमेंट के लिए ग्रामीणों से पानी सप्लाई की व्यवस्था संभालने के लिए 11-11 लोगों की अलग से समिति बना रखी है।

ज्ञात रहे ग्राम धाराखेड़ी चीलर बांध के डूब क्षेत्र में होने से डेम बनने के बाद 1966 से विस्थापित होकर दो अलग-अलग भागों में बसाया गया। शुरुआती दौर में नई बसाहट के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियां झेलना पड़ी। पानी के लिए भी निजी ट्यूबवेल और कुओं का चक्कर लगाना पड़ता। ऐसे में ग्रामीणों ने पीएचई के साथ मिलकर नल-जल योजना शुरू करने की मांग की। इस पर पीएचई ने करीब डेढ़ किमी दूर कुआं खुदवाया दिया, लेकिन लाइन डालने के लिए बजट की कमी पड़ गई। ऐसे के ग्रामीणों ने जन सहयोग के लिए कदम बढ़ाया। कुएं से गांव तक और गांव की गलियों में पाइप लाइन के लिए नाली ग्रामीणों ने अपने स्तर से खोदी। इसके बाद विभाग के पास रखे पाइप डालकर काम निपटा दिया। इसके बाद 1982 से सीधे पाइप लाइन के जरिए गांव में पानी सप्लाई होना शुरू हो गया। पानी सप्लाई व्यवस्था सतत चलती रही। पूर्व सरपंच बद्रीलाल डडानिया ने बताया पानी सप्लाई लगातार चलता रहे, इसके लिए ग्रामीणों से मिलकर धाराखेड़ी पूर्वी और धाराखेड़ी पश्चिमी दोनों गांवों में 11-11 सदस्यों की अलग से जल समिति बनाई। समिति को ही पानी सप्लाई व्यवस्था संचालित करते रहने का जिम्मा सौंपा गया। अब एक गांव धाराखेड़ी पश्चिमी में टंकी भी बना दी गई। अब इस गांव में टंकी के माध्यम से पानी सप्लाई होता है। धाराखेड़ी पूर्वी में अभी भी पाइप लाइन से ही पानी सप्लाई होता है।

धाराखेड़ी पूर्वी व पश्चिमी में कुल 300 कनेक्शन

जल समिति अध्यक्ष बद्रीलाल पाटीदार ने बताया धाराखेड़ी पूर्वी में 80 व पश्चिमी 217 नल कनेक्शन है। जलकर के रूप में 50 रु. लिए जाते हैं। इससे लाइन मरम्मत सहित पानी सप्लाई करने वाले दोनों कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान होता है।

गर्मी में एक दिन छोड़कर सप्लाई- वैसे तो दोनों गांवों में हर दिन पानी सप्लाई होता है, लेकिन भीषण गर्मी और गिरते जल स्तर के कारण इस बार कई पेयजल स्रोतों ने दम तोड़ दिया। इस कारण अब समिति ने एक दिन छोड़कर पानी प्रदाय करना शुरू कर दिया है। गांव के ज्यादातर घरों में पानी का टैंक बना है। इसमें ग्रामीण पानी जमा कर लेते हैं।

बिजली बिल का भुगतान कर रही ग्राम पंचायत

सरपंच रामचंद्र सौराष्ट्रीय ने बताया जल समिति को ग्राम पंचायत का भी पूरा सहयोग मिलता है। जल कर से सिर्फ मरम्मत और कर्मचारियों का मानदेय का भुगतान ही हो पाता है। इसके अलावा आने वाला खर्च जैसे बिजली बिल का भुगतान ग्राम पंचायत के माध्यम से ही कराया जाता है।

इसलिए लगातार चली आ रही व्यवस्था- पूर्व सरपंच डडानिया ने बताया पेयजल व्यवस्था सतत रूप से चलाने के लिए हमने इसे ग्राम पंचायत से अलग किया। पहले अध्यक्ष के रूप में 1982 में गांव के माखनसिंह पाटीदार को जल समिति का अध्यक्ष बनाकर 11 सदस्यीय समिति बनाई। ताकि सरपंच बदलने के बाद भी जलप्रदाय की व्यवस्था न गड़बड़ाए। धाराखेड़ी पूर्वी में भी ऐसी ही व्यवस्था की गई है। माखनसिंह पाटीदार ने 26 साल यह जिम्मा संभाला। पिछले 9 साल से बद्रीलाल पाटीदार जल समिति में बतौर अध्यक्ष ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था देख रहे हैं।

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