खराब परिणाम और शिक्षकों की अनदेखी के कारण जिले में सबसे खराब स्कूलों में शामिल होने वाले शासकीय हाई स्कूल करेड़ी के स्कूल का दसवीं का परिणाम अब 100 प्रतिशत हो गया। शिक्षा के मामले में बिलकुल पिछड़े गांव के रूप में पहचाने जाने वाले देहाती गांव में भी अब यहां के बच्चे पूरे ड्रेस कोड में स्कूल पहुंचते हैं। गले में आईडी कार्ड तक अनिवार्य है। 6 साल पहले वहां पदस्थ हुए शिक्षक जगदीश बामनिया पहले दिन स्कूल पहुंचे तो वहां की हालत देख दंग रह गए और उन्होंने स्कूल की दशा बदलने की ठान ली। देखते ही देखते स्कूल का प्लास्टर व रंगाई पुताई करवाई। इसके बाद ग्रामीणों से चर्चा की। स्कूल परिसर का अतिक्रमण हटाते हुए वहां भैंस आदि बांधना बंद करवाया। पढ़ाई पर फोकस करते हुए उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार की। 5 साल बाद स्कूल की तस्वीर ही बदल गई। स्कूल भवन के साथ परिसर चकाचक हो गया। इतना ही नहीं जिस स्कूल में बच्चे आना ही पसंद नहीं करते थे, अब पूरे ड्रेस कोड में शत-प्रतिशत उपस्थिति शुरू हो गई और वर्ष 2016 से लेकर 2018 तक अब हर साल इस स्कूल की कक्षा 10वीं का परिणाम 100 प्रतिशत हो गया।
पांच साल पहले कक्षों के सामने स्कूल मैदान में खड़ी थी फसलें, मवेशी बांधे जातेे... रिजल्ट भी जीरो, सुधार के बाद अब 100 फीसदी हुआ कक्षा दसवीं का परिणाम
पहले : स्कूल मैदान में खेत, वहीं मवेशी भी बंधे
पहले के हालात- 8 साल पहले वर्ष 2009-10 में शासकीय हाईस्कूल गांव के पुराने भवन में संचालित होता था। हाईस्कूल का प्रभारी भी प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक मुकेश शर्मा को बना रखा था। इस बीच खराब परिणाम के कारण यहां वर्ष 2011-12 में भोपाल से एक टीम आई और अवलोकन किया। प्रावि के शिक्षक के पास प्रभार होने पर वे टीम ने आपत्ति लेते हुए बामनिया को प्रभार सौंप दिया। इसी दौरान नए भवन में स्कूल शिफ्ट हो गया। बामनिया के प्रभार संभालने के बाद पहले साल दसवीं का रिजल्ट 33 प्रतिशत रहा।
अब : स्कूल परिसर पक्का, पौधे लहलहा रहे
ऐसे बढ़ाई उपस्थिति- जिस दिन कोई लड़की स्कूल नहीं आती। स्कूल प्रबंधन उसकी मां के नाम से एक पोस्टकार्ड लिखकर दूसरी छात्रा के हाथ पहुंचाते हैं। उस छात्रा को मां को वह पत्र पढ़कर सुनाना होता है। यदि लड़का अनुपस्थित रहता हैं तो पिता के नाम पत्र लिखकर क्लास के दूसरे बच्चे उनके घर पहुंचकर संंबंधित लड़के के पिता को पत्र पढ़कर सुनाते है। प्राचार्य बामनिया अपने स्तर से स्कूल में एडमिशन के लिए पंपलेट तैयार कर बंटवाते है। इधर, रिजल्ट सुधरने के बाद अब गांव को कोई भी बच्चा शाजापुर या माकड़ौन पढ़ाई के लिए नहीं जाता।
स्टॉफ कम, रिजल्ट ने चौंकाया
वर्ष 2018 में भी शासकीय हाईस्कूल करेड़ी की कक्षा 10वीं में कुल 17 बच्चे दर्ज थे। ये सभी बच्चे पास हो गए। इनमें से 12 बच्चे प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। खास बात यह है कि यह कमाल यहां के शिक्षकों ने स्टॉफ की कमी के बावजूद कर दिखाया है। स्कूल में प्राचार्य बामनिया के अलावा दो अध्यापक शंकरलाल सोलंकी और जितेंद्र गिरी गोस्वामी हैं। शिक्षण कार्य के लिए दो अतिथि विद्वान भी हैं। वैसे हाईस्कूल के मान से यहां 6 अध्यापकों का स्टॉफ होना चाहिए, लेकिन स्टॉफ की कमी के बावजूद यहां के शिक्षकों ने 100 प्रतिशत रिजल्ट देकर जिलेभर को चौंका दिया। जिस स्कूल का नाम उज्जैन जिले की सबसे खराब स्कूलों की गिनती में लिया जाता था, उसी करेड़ी हाईस्कूल का नाम अब अच्छे परिणाम देने वाले स्कूलों में सबसे ऊपर पहुंच गया।
100% परिणाम का फार्मूला
प्राचार्य बामनिया ने बताया बच्चों की पहचान कक्षा 9वीं से ही हो जाती है। सत्र के दौरान अर्द्धवार्षिक परीक्षा के बाद बच्चों की केटेगरी बना दी जाती है। ए, बी और सी केटेगरी बनाकर उन्हें उसी के मुताबिक तैयारी कराते है। बामनिया ने बताया पढ़ाई में तेज ए ग्रेड के बच्चों को टॉप कराने के लिए अलग से सिलेबस तैयार करते हैं। ऐसे ही कमजोर और सबसे कमजोर बच्चों को पासिंग नंबर उपलब्ध कराने के लिए विषयवार प्रश्नों की छंटनी कर उनकी तैयारी शुरू करा दी जाती है। उक्त प्रश्न संबंधित बच्चों को हर दिन हल करना होते है।