पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • एक ही पीटीआई बार बार नहीं जाएगा, हर खेल शिक्षक को मैनेजर बनकर जाना पड़ेगा जिले की टीम के साथ

एक ही पीटीआई बार-बार नहीं जाएगा, हर खेल शिक्षक को मैनेजर बनकर जाना पड़ेगा जिले की टीम के साथ

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
ब्लॉक व जिलों में स्कूली गेम्स कराने वाले सरकारी स्कूल के हर खेल शिक्षक को अब जिले की टीम के साथ मैनेजर बनकर संभागीय प्रतियोगिता में जाना पड़ेगा। एक ही पीटीआई (फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर) बार-बार टीम के साथ नहीं जाएगा। ना-नुकर करने वालों के खिलाफ संभागीय स्तर से कार्रवाई हो सकती है।

जानकारों की मानें तो स्कूली गेम्स में यह व्यवस्था तो उज्जैन संभाग में भी पहले से है, लेकिन इस साल स्कूली शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक स्तर से इसे सख्ती से फाॅलो करवाया जा रहा है। अधिकारी का मानना है कि सबको बराबरी से मौका मिलने से खिलाड़ियों को भी फायदा होगा। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की इस सख्ती के बाद जिले में पदस्थ कुछ पीटीआई की सांसें फूल सकती हैं। क्योंकि ये जिला तो दूर, ब्लॉक स्तर की प्रतियोगिता में ही सहयोग करने नजर नहीं आते। जिले में फिलहाल मात्र 13 शारीरिक व्यायाम शिक्षक ही हैं। 2 पीटीआई मैनेजर बनकर हाल ही में टीम के साथ जा चुके हैं। शेष 11 को अब जाना होगा।

पीटीआई को मौका भी मिलेगा, उत्साह भी बढ़ेगा

उच्च शिक्षा संयुक्त संचालक संजय गोयल बताते हैं स्कूली गेम्स में जिले के सभी पदस्थ सरकारी पीटीआई को टीम मैनेजर बनकर संभागीय स्पर्धा में खिलाड़ियों के साथ जाने की व्यवस्था तो पहले से ही है। हम इसे बार सिर्फ विशेष गंभीरता से फॉलो करा रहे हैं। सभी जिलों में जितने भी व्यायाम/खेल शिक्षक पदस्थ हैं, उन्हें संभागीय प्रतियोगिता में जिले की टीम का मैनेजर बनकर जाना ही है। इसके पीछे उद्देश्य यही है कि खिलाड़ी बच्चों के साथ नाइंसाफी न हो। उनकी सुरक्षा और सुविधा से जुड़े मामलों में कोई कमी न रहे। सभी पीटीआई को टीम मैनेजर बनकर संभाग व राज्य प्रतियोगिता में जाने का बराबरी से मौका मिलेगा तो उनमें भी उत्साह और बढ़ेगा।

संयुक्त संचालक ने कहा- सबको बराबरी से मौका मिलने से खिलाड़ियों को भी फायदा होगा

पहले यह होता था, अब सबको मौका इसलिए

सूत्रों ने बताया शाजापुर सहित संभाग के कई जिलों से पहले स्कूली गेम्स की संभागीय स्पर्धा में जिले से एक ही व्यायाम शिक्षक बार-बार टीम के साथ जाते थे। इनके बार-बार जाने से अन्य को मौका नहीं मिलता। विभाग पर बेवजह अंगुली उठती। इस साल से बरती जा रही सख्ती के तहत अब सबको मौका इसलिए दिया जा रहा है, ताकि उनका भी बराबर सहयोग मिलता रहे। वे भी संभागीय स्पर्धाओं में जाकर अपनी टीम को अपनी तरह से मार्गदर्शित करें।

अमला कम, उस पर भी गिने-चुने चेहरे ही दिखते हैं

व्यायाम शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता के मामले में जिले की स्थिति काफी खराब है। जिले के 106 सरकारी हाईस्कूल व हासे में से 43 में तो व्यायाम-खेल शिक्षकों की पोस्ट ही नहीं है। जिन गिने-चुने स्कूलों को मिलाकर जो 63 पद हैं, उनमें से भी 50 में पोस्टें खाली पड़ी हैं। इन पर अतिथि शिक्षक तक नियुक्त नहीं। जिले में इस साल हो रही सिंगल व टीम इवेंट गेम की 78 स्पर्धाओं का जिम्मा मात्र 13 पीटीआई के कंधों पर हैं। हाल ही में मुख्यालय पर जो जिला व संभागीय स्पर्धा हुई, उनमें व्यवस्था संभालने गिने-चुने चेहरे ही दिखे। ऐसे में सभी पीटीआई टीम मैनेजर बनकर संभागीय स्पर्धाओं में ड्यूटी देने जाएंगे, इस पर संशय है।

खबरें और भी हैं...