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प्रदेश में सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादन का रिकाॅर्ड बना चुके हैं यहीं के किसान, सीहोर कॉलेज के विद्यार्थी भी सीखते हैं बारीकियां

3 वर्ष पहले
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को शाजापुर आएंगे। यहां वे प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में किसानों को सौगात देंगे। जिले में कृषि कॉलेज खोलने की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसे मुख्यमंत्री पूरा कर दें, तो किसान और तरक्की कर सकते हैं। बगैर संसाधन और रिसर्च के ही शाजापुर के किसान पिछले कुछ सालों से खेती के मामले में अग्रणी बन गए। गेहूं उत्पादन में प्रदेश को कृषि कर्मण्य पुरस्कार दिलाने में भी जिले के किसानों का खासा योगदान है। गेहूं का सबसे ज्यादा उत्पादन का रिकाॅर्ड शाजापुर जिले की कालापीपल तहसील के जयनारायण पाटीदार ने बनाया। सीएम खुद उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। आलू, प्याज, लहसुन सहित औषधीय फसल और बुआई के नए तरीके प्रयोग करने के मामले में भी यहां के किसान सबसे आगे हैं। ऐसे में यदि यहां कृषि कॉलेज खुल जाए तो किसानों को ज्यादा फायदा होगा। वैज्ञानिकों से संपर्क और रिसर्च से जुड़कर क्षेत्र के किसान खेती की नई इबारत गढ़ सकते हैं। युवाओं का भी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की तरफ रुझान बढ़ेगा।

4-5 साल से इसकी मांग उठ रही है। विधायक अरुण भीमावद ने भी इसका प्रस्ताव तैयार कराया। कृषि कॉलेज के पैरामीटर 30 से 40 हेक्टेयर जमीन एक ही परिसर में उपलब्ध होने जैसे मापदंडों को देखा और जमीन की तलाश कराई, जमीन मिली भी। हालांकि शासकीय मापदंड से करीब 8 हेक्टेयर कम मिली। जिले में शासकीय जमीन के अभाव का हवाला देते हुए उन्होंने उक्त नियम में कुछ शिथिलता बरतते हुए जिले में कृषि काॅलेज खुलवाने की मांग की है। सीएम के सामने भी कई बार प्रस्ताव भेजा गया है। सीएम खुद मंच से तीन-चार बार इसके लिए आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन फाइनल स्वीकृति नहीं मिलने के कारण फाइल अब तक आगे नहीं बढ़ सकी।

कॉलेज क्यों खुले... इसके चार ठोस कारण

1. फायदा छह जिलों को मिलेगा

किसानों को खेती करने के लिए और भी नए रास्ते दिखेंगे। ज्यादा कृषि वैज्ञानिकों से किसानों का संपर्क होगा। कॉलेज विद्यार्थी रिसर्च कर नए बीज और बुवाई के नए तरीके ईजाद करेंगे। इसका सीधा फायदा शाजापुर सहित जिले से जुड़े आगर-मालवा, उज्जैन, देवास, राजगढ़ व सीहोर जिले के किसानों को भी होगा।

2. आलू, प्याज, संतरे में भी बनाई पहचान

आलू और प्याज की बंपर पैदावार के साथ ही उच्च क्वालिटी के कारण देशभर में यहां के आलू-प्याज की डिमांड रहती है। शाजापुर की जलवायु में पैदा होने वाले संतरे की देश सहित विदेशों में भी मांग रहती है। इसकी ब्रांडिंग के लिए 3 साल पहले से संतरा उत्सव भी शुरू हुआ। यहां के संतरे को सीएम ने ब्रांड बनाया। नाम दिया- मालवा फ्रेश। औषधीय फसलोंं में भी हमेशा ही यहां के किसान आगे रहते हैं।

3. प्रयोग व बंपर पैदावार में जिला अव्वल

औषधीय फसल और बुआई के नए तरीके प्रयोग करने के मामले में भी यहां के किसान सबसे आगे हैं। ईसबगोल से लेकर एलोविरा, ग्वारगम जैसी औषधीय गुण वाली खेती यहां होती है। इसके अलावा जिले की कालापीपल तहसील के ग्राम खरदोनकलां निवासी जयनारायण पाटीदार ने 2014-15 में 102 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं उत्पादन कर प्रदेश सरकार को भी चौंका दिया। औसतन 75-80 क्विंटल गेहूं उत्पादन होता है। उनके बंपर उत्पादन लेने पर सीएम चौहान ने 31 जनवरी 2016 को भोपाल में उनका सम्मान भी किया था।

4. खेती पर प्रैक्टीकल करने आते हैं विद्यार्थी

कृषि महाविद्यालय सीहोर के विद्यार्थी भी हर साल कृषि संबंधी व्यावहारिक ज्ञान लेने के लिए शाजापुर आते हैं। यहां कृषि विज्ञान केंद्र गिरवर में करीब साढ़े पांच से छह माह तक रहकर वे किसानों से मिलते हैं। खेती करने का तरीका देखकर प्रेक्टिकल अनुभव लेते हैं।

1. फायदा छह जिलों को मिलेगा

किसानों को खेती करने के लिए और भी नए रास्ते दिखेंगे। ज्यादा कृषि वैज्ञानिकों से किसानों का संपर्क होगा। कॉलेज विद्यार्थी रिसर्च कर नए बीज और बुवाई के नए तरीके ईजाद करेंगे। इसका सीधा फायदा शाजापुर सहित जिले से जुड़े आगर-मालवा, उज्जैन, देवास, राजगढ़ व सीहोर जिले के किसानों को भी होगा।

2. आलू, प्याज, संतरे में भी बनाई पहचान

आलू और प्याज की बंपर पैदावार के साथ ही उच्च क्वालिटी के कारण देशभर में यहां के आलू-प्याज की डिमांड रहती है। शाजापुर की जलवायु में पैदा होने वाले संतरे की देश सहित विदेशों में भी मांग रहती है। इसकी ब्रांडिंग के लिए 3 साल पहले से संतरा उत्सव भी शुरू हुआ। यहां के संतरे को सीएम ने ब्रांड बनाया। नाम दिया- मालवा फ्रेश। औषधीय फसलोंं में भी हमेशा ही यहां के किसान आगे रहते हैं।

3. प्रयोग व बंपर पैदावार में जिला अव्वल

औषधीय फसल और बुआई के नए तरीके प्रयोग करने के मामले में भी यहां के किसान सबसे आगे हैं। ईसबगोल से लेकर एलोविरा, ग्वारगम जैसी औषधीय गुण वाली खेती यहां होती है। इसके अलावा जिले की कालापीपल तहसील के ग्राम खरदोनकलां निवासी जयनारायण पाटीदार ने 2014-15 में 102 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं उत्पादन कर प्रदेश सरकार को भी चौंका दिया। औसतन 75-80 क्विंटल गेहूं उत्पादन होता है। उनके बंपर उत्पादन लेने पर सीएम चौहान ने 31 जनवरी 2016 को भोपाल में उनका सम्मान भी किया था।

4. खेती पर प्रैक्टीकल करने आते हैं विद्यार्थी

कृषि महाविद्यालय सीहोर के विद्यार्थी भी हर साल कृषि संबंधी व्यावहारिक ज्ञान लेने के लिए शाजापुर आते हैं। यहां कृषि विज्ञान केंद्र गिरवर में करीब साढ़े पांच से छह माह तक रहकर वे किसानों से मिलते हैं। खेती करने का तरीका देखकर प्रेक्टिकल अनुभव लेते हैं।

यहां हो सकता है कॉलेज तैयार गिरवर के समीप कृषि विभाग की 22 एकड़ जमीन है। यह स्थान कृषि महाविद्यालय के लिए सबसे अच्छा स्थान साबित हो सकता है। समीप ही कृषि विज्ञान केंद्र होने से भी विद्यार्थियों को रिसर्च व प्रेक्टिकल करने में आसानी होगी। विभागीय अधिकारी यहां खेती कराते हैं। उपज बेचने को लेकर कई बार गड़बड़ी की शिकायतें भी सामने आई हैं।

1. फायदा छह जिलों को मिलेगा

किसानों को खेती करने के लिए और भी नए रास्ते दिखेंगे। ज्यादा कृषि वैज्ञानिकों से किसानों का संपर्क होगा। कॉलेज विद्यार्थी रिसर्च कर नए बीज और बुवाई के नए तरीके ईजाद करेंगे। इसका सीधा फायदा शाजापुर सहित जिले से जुड़े आगर-मालवा, उज्जैन, देवास, राजगढ़ व सीहोर जिले के किसानों को भी होगा।

2. आलू, प्याज, संतरे में भी बनाई पहचान

आलू और प्याज की बंपर पैदावार के साथ ही उच्च क्वालिटी के कारण देशभर में यहां के आलू-प्याज की डिमांड रहती है। शाजापुर की जलवायु में पैदा होने वाले संतरे की देश सहित विदेशों में भी मांग रहती है। इसकी ब्रांडिंग के लिए 3 साल पहले से संतरा उत्सव भी शुरू हुआ। यहां के संतरे को सीएम ने ब्रांड बनाया। नाम दिया- मालवा फ्रेश। औषधीय फसलोंं में भी हमेशा ही यहां के किसान आगे रहते हैं।

3. प्रयोग व बंपर पैदावार में जिला अव्वल

औषधीय फसल और बुआई के नए तरीके प्रयोग करने के मामले में भी यहां के किसान सबसे आगे हैं। ईसबगोल से लेकर एलोविरा, ग्वारगम जैसी औषधीय गुण वाली खेती यहां होती है। इसके अलावा जिले की कालापीपल तहसील के ग्राम खरदोनकलां निवासी जयनारायण पाटीदार ने 2014-15 में 102 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं उत्पादन कर प्रदेश सरकार को भी चौंका दिया। औसतन 75-80 क्विंटल गेहूं उत्पादन होता है। उनके बंपर उत्पादन लेने पर सीएम चौहान ने 31 जनवरी 2016 को भोपाल में उनका सम्मान भी किया था।

4. खेती पर प्रैक्टीकल करने आते हैं विद्यार्थी

कृषि महाविद्यालय सीहोर के विद्यार्थी भी हर साल कृषि संबंधी व्यावहारिक ज्ञान लेने के लिए शाजापुर आते हैं। यहां कृषि विज्ञान केंद्र गिरवर में करीब साढ़े पांच से छह माह तक रहकर वे किसानों से मिलते हैं। खेती करने का तरीका देखकर प्रेक्टिकल अनुभव लेते हैं।

इस बार पूरी उम्मीद सौगात मिल जाएगी

जिले में कृषि कॉलेज की महती आवश्यकता है। यहां के किसान हमेशा नवाचार कर कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में कृषि महाविद्यालय खुलने के बाद उन्हें और प्रोत्साहन मिलेगा और खेती के मामले में प्रदेश का नाम देश में राेशन करेंगे। कई बार सीएम साहब से मांग कर चुका हूं। इस बार उम्मीद करते हैं कि वे कुछ निर्णय लें। -अरुण भीमावद, विधायक शाजापुर

1. फायदा छह जिलों को मिलेगा

किसानों को खेती करने के लिए और भी नए रास्ते दिखेंगे। ज्यादा कृषि वैज्ञानिकों से किसानों का संपर्क होगा। कॉलेज विद्यार्थी रिसर्च कर नए बीज और बुवाई के नए तरीके ईजाद करेंगे। इसका सीधा फायदा शाजापुर सहित जिले से जुड़े आगर-मालवा, उज्जैन, देवास, राजगढ़ व सीहोर जिले के किसानों को भी होगा।

2. आलू, प्याज, संतरे में भी बनाई पहचान

आलू और प्याज की बंपर पैदावार के साथ ही उच्च क्वालिटी के कारण देशभर में यहां के आलू-प्याज की डिमांड रहती है। शाजापुर की जलवायु में पैदा होने वाले संतरे की देश सहित विदेशों में भी मांग रहती है। इसकी ब्रांडिंग के लिए 3 साल पहले से संतरा उत्सव भी शुरू हुआ। यहां के संतरे को सीएम ने ब्रांड बनाया। नाम दिया- मालवा फ्रेश। औषधीय फसलोंं में भी हमेशा ही यहां के किसान आगे रहते हैं।

3. प्रयोग व बंपर पैदावार में जिला अव्वल

औषधीय फसल और बुआई के नए तरीके प्रयोग करने के मामले में भी यहां के किसान सबसे आगे हैं। ईसबगोल से लेकर एलोविरा, ग्वारगम जैसी औषधीय गुण वाली खेती यहां होती है। इसके अलावा जिले की कालापीपल तहसील के ग्राम खरदोनकलां निवासी जयनारायण पाटीदार ने 2014-15 में 102 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं उत्पादन कर प्रदेश सरकार को भी चौंका दिया। औसतन 75-80 क्विंटल गेहूं उत्पादन होता है। उनके बंपर उत्पादन लेने पर सीएम चौहान ने 31 जनवरी 2016 को भोपाल में उनका सम्मान भी किया था।

4. खेती पर प्रैक्टीकल करने आते हैं विद्यार्थी

कृषि महाविद्यालय सीहोर के विद्यार्थी भी हर साल कृषि संबंधी व्यावहारिक ज्ञान लेने के लिए शाजापुर आते हैं। यहां कृषि विज्ञान केंद्र गिरवर में करीब साढ़े पांच से छह माह तक रहकर वे किसानों से मिलते हैं। खेती करने का तरीका देखकर प्रेक्टिकल अनुभव लेते हैं।

एक लाख किसानों का टारगेट, डोम और टेंट 50 हजार के हिसाब से

किसान समृद्ध योजना का सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान शाजापुर से शुभारंभ करेंगे। वे दोपहर 12.50 बजे नगर पहुंचेंगे। योजना की शुरुआत के बाद दोपहर 2.46 बजे यहां से फिर भोपाल के लिए रवाना हो जाएंगे। सम्मेलन में एक लाख किसानों को बुलाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन आंधी से उड़े डोम के बाद जिम्मेदारों ने पंडाल स्थल छोटा कर दिया। सभा स्थल पर 40 हजार वर्ग मीटर का डोम लगाया गया है। साथ ही टेंट आदि को मिलाकर यहां करीब 50-60 हजार लोग ही बैठ सकेंगे। हालांकि जिम्मेदारों का कहना है एक लाख लोगों की क्षमता के मुताबिक ही टेंट व अन्य तैयारियां की हैं। लालघाटी के बाद वाला पूरा क्षेत्र सोमवार को आयोजन के लिए रिजर्व रखा गया है। कई जिलों से किसानों के आने के कारण वाहनों का दबाव बढ़ेगा और शहर में दिनभर जाम जैसी स्थिति बन सकती है।

क्लिक करने के 15 मिनट बाद खाते में पहुंच जाएगी राशि- पिछले साल जिन किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचा था। उन्हें 200 रुपए प्रति क्विंटल के मान से बोनस मिलेगा। योजना का फायदा शाजापुर से ही सभी किसानों को मिलेगा। सीएम के एक क्लिक करते ही किसी किसान को 15 मिनट तो किसी को आधे घंटे में खाते में बोनस राशि जमा हो जाने का मैसेज मिल जाएगा। जिले के 20 हजार किसानों को इसका फायदा मिलेगा।

एक लाख 13 हजार किसानों को भू-अधिकार पुस्तिका देंगे- सीएम की नई पहल के तहत आवासीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग जिनके पास भू- अधिकार पुस्तिका नहीं है लेकिन आवासीय क्षेत्रों में प्लॉट या मकान है। जिले के ऐसे 1 लाख 13 हजार लोगों की पहचान की गई है। उक्त लोगों को सीएम को अपने प्लॉट की भू-अधिकार पुस्तिका देने की शुरुआत भी सीएम करेंगे।

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