पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • ग्राम खेड़ापहाड़ में पेयजल संकट

ग्राम खेड़ापहाड़ में पेयजल संकट

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पीने के पानी के लिए बच्चों ने स्कूल छोड़ा, माता-पिता के साथ 15-20 बच्चे रोज सुबह तीन किमी दूर जंगल के कुएं से ला रहे पानी


ग्राम खेड़ापहाड़ में पेयजल संकट

800 की आबादी वाले गांव के हैंडपंपों सूखे, सरकारी कुएं में दबंगों ने डाली मोटरें, अन्य ग्रामीण नहीं भर पा रहे पानी

भास्कर संवाददाता. शाजापुर

पेयजल संकट के कारण जिला मुख्यालय से 6 किमी दूर स्थित ग्राम खेड़ापहाड़ के बच्चों की शिक्षा ही ठप हो गई है। गांव के 15-20 बच्चों ने पानी की जुगाड़ के चक्कर में स्कूल जाना बंद कर दिया। घर के बुजुर्गों से लेकर महिलाएं पैदल और साइकिल लेकर घर से करीब तीन किमी दूर तक भटक रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दबंगों ने सरकारी कुएं में मोटर लगा रखी है। ऐसे में उनके गांव के लिए पानी की समस्या विकराल हो गई। यहां की 14 वर्षीय लक्ष्मी ने बताया हमारे लिए पानी ही सबसे जरूरी है। गांव की बुजुर्ग महिला की मानें तो नई बहुएं दूर-दूर जाकर पानी भरने में कतराने लगी हैं। पानी के चक्कर में परिवार में खींचतान होने लगी है। इस गांव की 800 से ज्यादा आबादी के लिए जंगल क्षेत्र में निजी और सरकारी कुएं से ही पानी की पूर्ति हो पा रही है।

तीन किमी दूर बिना मुंडेर का कुआं, इसी गांव के कुएं में अब तक 3 बच्चे डूबे

तीन किमी दूर जंगल के कुएं से ग्रामीण पानी लाते हैं। उसमें मुंडेर भी नहीं है। इससे हादसे का अंदेशा बना हुआ है। गत वर्ष इसी गांव के एक कुएं में तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई थी। बावजूद इसके पानी के लिए ग्रामीण अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं।

ग्रामीण बोले- 30 साल से झेल रहे संकट, छोड़ना पड़ेगा गांव

ग्रामीण शांतिलाल ने बताया गांव में पेयजल को लेकर करीब 30 साल से यही स्थिति हर साल बनती है। बावजूद जनप्रतिनिधि सहित अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। यही हाल रहे तो आने वाले दिनों में यह पूरी बस्ती पलायन कर जाएगी।

शिक्षक ने कहा- हां, पानी के कारण नहीं आ रहे बच्चे उनके परिजन को समझाया है

प्रावि खेड़ापहाड़ के शिक्षक प्रेमनारायण कछावा के अनुसार पानी की कमी के कारण बच्चों के घर से ही पानी बाटल में मंगवाया जाता है। कई बार बच्चों के स्कूल नहीं आने पर उनके घर जाकर अभिभावकों को समझाइश भी दी जाती है, लेकिन गांव में पीने के पानी की समस्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। फोटो : संदीप गुप्ता

खबरें और भी हैं...