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डिग्री पूरी होने तक पढ़ाई कर सकेंगे विद्यार्थी अब बीच में कॉलेज छोड़ने का नहीं रहेगा डर

3 वर्ष पहले
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उच्च शिक्षित बनने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर है। कॉलेज में दाखिला लेने के बाद अब वह अपनी डिग्री पूरी होने तक पढ़ाई कर सकेंगे। बीच में कॉलेज छोड़ने का डर नहीं रहेगा। स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं के सामान्य पाठ्यक्रमों की निर्धारित अधिकतम अवधि में भी कोई पढ़ाई पूरी नहीं कर पाता है तो ऐसी स्थिति में वह एक्सटेंशन के रूप में एक साल का अतिरिक्त समय इस काम के लिए ले सकेगा। उच्च शिक्षा विभाग तो बीते साल ही इसे अमल में ला चुका था। वहीं विक्रम विवि उज्जैन प्रबंधन ने भी बीती 11 अप्रैल को इस संबंध में अपनी वेबसाइट के जरिए एक अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना में उल्लेख है कि विवि की 29 नवंबर 2017 को जारी एक अधिसूचना के अनुक्रम में यदि कोई विद्यार्थी स्नातक व स्नातकोत्तर के सामान्य पाठ्यक्रमों की अधिकतम अवधि पांच व चार साल में पूरी नहीं कर पाते हैं तो ऐसे विद्यार्थी संबंधित महाविद्यालय अनुमति प्राप्त कर एक साल का एक्सटेंशन ले सकेंगे। दूसरे सेमेस्टर में केवल उन्हें ही अनुमति दी जाएगी, जिन्होंने तीसरा, चौथा, पांचवां और छठा सेमेस्टर पास कर लिया है। जिन्हें एक्सटेंशन दिया है, उनके परीक्षा फार्म भी संबंधित कॉलेज प्राचार्य ही ऑनलाइन अप्रूवल करेंगे। इस बात का भी स्पष्ट उल्लेख है कि यदि कोई एक्सटेंशन का उपयोग करने के बाद भी निर्धारित अवधि में पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर पाता है तो बचा पाठ्यक्रम/ पढ़ाई प्राइवेट छात्र के रूप में करके पास करना होगा। विवि ने छात्र हित में ऐसे विद्यार्थियों के दूसरे, चौथे व छठे सेमेस्टर की परीक्षाओं के फार्म 14 अप्रैल तक एमपी ऑनलाइन के माध्यम से जमा करवाने की प्रक्रिया की है।

सेमेस्टर पद्धति खत्म करने का असर है

लीड बीएसएन शासकीय पीजी कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. वी.के. शर्मा बताते हैं उच्च शिक्षा विभाग ने सेमेस्टर पद्धति को खत्म करने का निर्णय ले लिया है। इस सत्र से कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष के रूप में छात्रों को दाखिला मिला है। स्नातक-स्नातकोत्तर कक्षाओं के सामान्य पाठ्यक्रमों की पढ़ाई निर्धारित अवधि में भी पूरी नहीं होने पर अतिरिक्त समय के रूप में एक साल एक्सटेंशन देने की प्रक्रिया भी इसी का एक असर कहा जा सकता है। विवि ने अधिसूचना जारी की है।

पहले समय सीमा में डिग्री पूरी करना होती थी

प्राचार्य डॉ. शर्मा कहते हैं इस व्यवस्था के पहले यूजी-पीजी के विद्यार्थियों को समय सीमा में ही डिग्री पूरी करना होती थी। तय समयावधि में जो डिग्री की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाता था, उस विद्यार्थी का प्रवेश स्वत: ही निरस्त माना जाता था। नई व्यवस्था से ऐसे विद्यार्थियों को जो किसी कारणवश पाठ्यक्रम की डिग्री पूरी नहीं कर पाए हैं और यह करना चाहते हैं, उन्हें लाभ मिलेगा।

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