लगातार गिरते भू-जल और अल्पवर्षा के कारण इस बार जिले में पेयजल की समस्या विकराल होने लगी है। हालात ये हैं कि शहरी क्षेत्रों में कहीं दो तो कहीं 8-10 दिन बाद पानी मिल पाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात बेकाबू होते नजर आने लगे हैं। खेड़ा पहाड़, बाड़ीगांव, भालूखेड़ा सहित 25 से ज्यादा गांवों में तो पानी के लिए हाहाकार मच गया। सुबह से देररात तक इन गांवों के लोग प्यास बुझाने के लिए पानी का इंतेजाम करने में ही लगे रहते है। कई-कई किमी भटकने के बाद भी उन्हें दम तोड़ते कुओं में जमा गंदे पानी से प्यास बुझाना पड़ रही है। इधर, समस्या का समाधान करने का दावा करने वाले अफसर सिर्फ कागजी खानापूर्ति में लगे हैं।
बता दें जिले में ऐसे हालात 10 साल बाद बने हैं। वर्ष 2008 में भी अल्पवर्षा के बाद गर्मी में ऐसी दिक्कत आई थी। अब फिर जिले में ऐसे ही हालात बनने लगे हैं। खास बात यह है कि भू-जल स्तर गिरने से विभागीय अधिकारी भी ग्रामीणों की परेशानी दूर करने में नाकाम दिख रहे हैं। जलस्रोतों के सूखने के बाद कई गांवों में दूसरा विकल्प भी नहीं है। ऐसे में लोगों को दूसरे गांवों से पानी ला रहे हैं। हालांकि अल्पवर्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इस बार 2 करोड़ 41 लाख रुपए की योजना बनाई। जिम्मेदारों की मानें तो राशि भी खर्च की जा रही है। बावजूद पेयजल संकट की समस्या बढ़ रही है। समय रहते यदि प्रशासन ने ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई तो जल्द ही यह समस्या बेकाबू हो जाएगी।
जिले में लगातार भू-जल स्तर गिरता जा रहा है। स्थिति यह है कि कई गांवों में जमीन में भी पानी नहीं है। इतनी गहराई से आने वाले पानी का स्वाद भी नहीं है। बावजूद लोगों को इसी से प्यास बुझाना पड़ रही है। जिले का औसत भू-जल स्तर भी इस बार 180 फीट पर पहुंच गया है।
जिले में कुल 4660 हैंडपंप हैं। इनमें से जलस्तर गिरने से 550 हैंडपंप की सांस फुल गई है। ऐसे में इन गांवों में अभी से पेयजल संकट के आसार बन रहे हैं।
जिले के ग्राम सतगांव में एक ही हैंडपंप पर पूरा गांव निर्भर है। ऐसे में यहां सुबह से रात तक भीड़ लगी रहती है।
सतगांव के सभी हैंडपंप बंद
जिले के ग्राम सतगांव में अधिकांश हैंडपंप दम तोड़ चुके हैं। गांव में एक ही हैंडपंप है जिससे पानी निकल रहा है। ऐसे में पूरा गांव इसी हैंडपंप के सहारे है। सरपंच प्रतिनिधि ओमप्रकाश सोलंकी ने बताया गांव में पानी की समस्या आ रही है। इस संबंध में पंचायत द्वारा पीएचई विभाग को अवगत करा दिया है, लेकिन विभाग द्वारा अब तक पानी की समस्या से निपटने के लिए काेई ठाेस कदम नहीं उठाया है। पंचायत स्तर पर जो व्यवस्था हो रही है, वह की जा रही है।