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जो जमीन मिलनी थी, उस पर हुआ कब्जा न शॉपिंग कॉम्पलेक्स बना न मैरिज गार्डन

3 वर्ष पहले
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शहर के बीचोंबीच जल संसाधन विभाग की 100 बीघा जमीन में चंबल कॉलोनी सहित सरकारी कार्यालय बने हुए हैं। इस जमीन में से 33 बीघा जमीन नगर पालिका को देने का प्रस्ताव तैयार किया गया था लेकिन इस प्रस्ताव पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस जमीन पर कई लोग कब्जा करते जा रहे हैं। कई लोगों ने यहां मकान तक बना लिए हैं। जमीन नहीं मिलने से न शॉपिंग कॉम्पलेक्स बन सका और न मैरिज गार्डन। यदि यह जमीन नगर पालिका को मिल जाए तो शॉपिंग कॉम्पलेक्स, मैरिज गार्डन बनाने सहित अन्य विकास कार्य कराए जा सकते हैं। इससे सैकड़ों लोगों को रोजगार के साथ सुविधाएं भी मिलेंगी।

जमीन पर लोग लगातार अतिक्रमण करते जा रहे हैं। जल संसाधन विभाग इन लोगों को रोक नहीं पा रहा है। इस जमीन पर कई लोगों ने मकान तक बना लिए हैं। पाली रोड की तरफ गुमटियां रखकर कब्जे कर लिया है। वहीं चंबल कॉलोनी में नगर पालिका सड़क, बिजली व सफाई की सुविधा मुहैया नहीं करा रही है। कॉलोनी में पांच सौ से अधिक परिवार अभावों के बीच जीवन यापन को मजबूर हैं। कॉलोनी में सालों पुराने आवास भी जर्जर हालत में हैं। इससे कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।

कई विकास कार्यों जमीन न होने के कारण अटके, नपा अफसर भी नहीं दे रहे ध्यान

चंबल कॉलोनी की पाली रोड किनारे जमीन पर लोगों ने दुकानें रखकर किया कब्जा।

पुराने जिला अस्पताल की जमीन भी नपा को नहीं मिली

गोलंबर व जय स्तंभ के पीछे पुराना अस्पताल परिसर है। जिला अस्पताल सहित सीएमएचओ दफ्तर के लिए बहुत पहले ही नई जमीन मिल चुकी है। नया अस्पताल संचालित भी हो रहा है लेकिन पुराने अस्पताल की बिल्डिंग को नगर पालिका को नहीं दिया जा रहा। शहर में पार्किंग की गंभीर समस्या है। एसएएफ लाइन की दुकानों के पीछे हटाकर नई दुकानें बनाने पर भी नगर पालिका प्रयासरत है लेकिन इस दिशा में बात आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे ट्रैफिक की समस्या भी बनी हुई है।

पूर्व कलेक्टर रूपला के समय शुरू हुई थी जमीन देने की कवायद

चंबल कॉलोनी की जमीन के बंटवारे के लिए पूर्व कलेक्टर एसएन रूपला के समय कवायद शुरू हुई थी। विधिवत ड्राइंग तैयार कराकर 100 बीघा में से एक हिस्सा नगर पालिका, दूसरा हाउसिंग बोर्ड और तीसरा हिस्सा स्वयं जल संसाधन विभाग के पास रहना था। कलेक्टर रूपला के तबादले के बाद इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नई परिषद के गठन के बाद भी अब तक नपा की तरफ से ठोस पहल नहीं की गई।

नए भवन के बाद भी टेलीफोन एक्सचेंज की जमीन खाली नहीं

जय स्तंभ के ठीक सामने पुराना टेलीफोन एक्सचेंज संचालित है जबकि बायपास के पास नई बड़ी बिल्डिंग बन चुकी है। यहां मुख्य कार्यालय संचालित भी हो रहा है लेकिन बीएसएनएल की तरफ से पुराने टेलीफोन एक्सचेंज की जमीन खाली नहीं की जा रही। इसे लेकर नगर पालिका के पूर्व सीएमओ न्यायालय तक मामला ले गए थे। इसके बाद नगर पालिका ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की। यदि जमीन मिलती है तो यहां नया शॉपिंग कॉम्पलेक्स भी बनाया जा सकता है।

इधर, शिवपुरी बस स्टैंड की जमीन पर भी हो रहे कब्जे

शहर के अंदर दीनदयाल बस स्टैंड शुरू होने के बाद पुराने शिवपुरी बस स्टैंड की जमीन खाली पड़ी है। नगर पालिका ने यहां मैरिज गार्डन के साथ-साथ सामुदायिक भवन बनाने का प्रस्ताव परिषद की बैठक में मंजूर कराया है लेकिन प्रस्ताव पास होने के बाद आगे कोई प्रयास नहीं किए गए। जमीन पर धीरे-धीरे लोग कब्जा करते जा रहे हैं। गुमटियां आदि रखकर लोग नगर पालिका की जमीन पर अतिक्रमण करते जा रहे हैं।

अब हम नए कलेक्टर के सामने रखेंगे यह मामला

जल संसाधन विभाग की चंबल कॉलोनी की जमीन का एक तिहाई हिस्सा नगर पालिका को मिलना है। पांच-छह साल पूर्व इसका प्रस्ताव बनाकर प्रशासन ने शासन को भी भेजा था। आगे कार्रवाई की जानकारी लेने पर पता चला कि कमिश्नर ने कलेक्टर रेट से प्रीमियम शुल्क जमा कराने के लिए पत्र लिखा था। इस संबंध में कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल को अवगत कराया गया था लेकिन उनका श्योपुर से तबादला हो गया। अब नए कलेक्टर के सामने मामला रखेंगे। दौलतराम गुप्ता, अध्यक्ष, नगर पालिका श्योपुर

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