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औषधालय में स्टाफ नहीं, मरीज परेशान

3 वर्ष पहले
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ढोढर कस्बे में आयुर्वेदिक औषधालय के संचालन में कागजी खानापूर्ति की जा रही है। पिछले तीन माह से औषधालय नहीं खुल रहा है। पदस्थ वैद्य और एएनएम के ड्यूटी से नदारद रहने से कस्बे सहित आसपास के 22 गांव के मरीजों को आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक साल से औषधालय का ढर्रा बिगड़ा हुआ है। पूरा स्टाफ नदारद रहने से नियमित मरीजों ने आना बंद कर दिया है।

कस्बेवासियों ने औषधालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं की शिकायत जिला आयुर्वेद अधिकारी से करते हुए मौके पर मुआयना करने का आग्रह किया है। ढोढर में आयुर्वेदिक औषधालय अव्यवस्थाओं का केंद्र बना हुआ है। विभागीय अधिकारी कई साल से निरीक्षण करने नहीं आए है।

विभाग ने करीब 23 साल से खाली पड़ा वैद्य का पद तो भर दिया है, लेकिन यहां पदस्थ वैद्य मुख्यालय पर आते ही नहीं है। पदस्थ एएनएम भी ड्यूटी से गोल रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि आयुर्वेदिक औषधालय पर तीन महीने से गेट पर ताला लगा है। पारम नदी क्षेत्र में अग्रवाल धर्मशाला और पुराने थाने के पास आयुर्वेदिक औषधालय भवन भी जर्जर हो चुका है। कस्बे सहित ढोढर क्षेत्र के 20 गांव के लोगों को आयुर्वेदिक औषधालय का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ढोढर में पदस्थ वैद्य और एएनएम के मुख्यालय से अनुपस्थित रहने से मरीजों को नहीं मिल रहा इलाज

शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं करते अफसर

ढोढर में औषधालय नहीं खुलने से सबसे ज्यादा परेशानी उन बुजुर्ग मरीजों को हो रही है जिन्हें आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति रास आती है।जोड़ों में दर्द, बाय, गठान, कब्ज और एंठन की शिकायत से पीड़ित कई लोगों ने बताया कि उन्हें होम्योपैथी से इलाज कराने में कोई फायदा नहीं मिलता है। इलाज कराने की आस लेकर जब डिस्पेंसरी पर जाते हैं तो गेट पर ताला लटका दिखाई देता है। हमेशा बंद मिलने के कारण यहां आने वाले मरीजों की संख्या नगण्य हो गई है। स्थानीय निवासी गोपीलाल , रमेशचंद्र , रफीक मोहम्मद ने बताया कि आयुर्वेदिक औषधालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं की शिकायत कई बार श्योपुर जाकर कलेक्टर समेत जिला आयुर्वेद अधिकारी से कर चुके हैं। लेकिन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया है। व्यवस्था सुधरने के बजाय उल्टे बिगड़ गई है।

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