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ट्रांसपोर्ट नगर में शिफ्ट नहीं किए जा रहे गोदाम, बाजार में भारी वाहनों से लोग परेशान

3 वर्ष पहले
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शहर के पुराने शिवपुरी बस स्टैंड को नगर पालिका ने अलग से ट्रांसपोर्ट नगर बनाया और ट्रांसपोर्टरों को इसमें दुकानें भी आवंटित कराई। लेकिन व्यापारी वर्ग इन दुकानों पर अपने गोदाम लेकर नहीं गए, शहर के पुराने ट्रांसपोर्टर नगर में ही इनका व्यापार जमा रखा। जिसे लेकर नपा और पुलिस ने भी कोई पहल नहीं की। नतीजा शहर में ट्रक न सिर्फ घुस रहे है, बल्कि माल की लोडिंग और अनलोडिंग भी बीच शहर में की जा रही है, जो आम लोगों के लिए ट्रैफिक जाम से लेकर जान का खतरा बनी हुई है।

सामान्य वन मंडल कार्यालय के पास शिवपुरी रोड पर नपा व अन्य दुकानों पर व्यापारी व ट्रांसपोर्टर अपना कारोबार करते है। यहीं व्यापारियों ने अपने गोदाम भी घरों व मोहल्लों में बना लिए है। जिन पर दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में लोगों को कई बार अपने घरों तक में घुसने में परेशानी उठानी पड़ती है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर पालिका ने 5 साल पहले पुराने शिवपुरी बस स्टैंड पर बनाई गई दुकानों में व्यापारी व ट्रांसपोर्टरों की शिफ्टिंग की योजना बनाई और उन्हें सस्ते में प्लाट व दुकानें आवंटित की, ताकि ट्रांसपोर्ट नगर शहर से दूर बस जाए और ट्रैफिक से लेकर लोगों को आ रही परेशानियां दूर हो सके। लेकिन 5 साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए है। न तो उक्त स्थान से व्यापारियों के गोदाम शिफ्ट हुए है और नहीं ट्रांसपोर्टर। जिससे भारी वाहनों का प्रवेश अब भी शहर में बना हुआ है। ट्रकों की लाइन दिनभर पुराने ट्रांसपोर्ट नगर में लगी रहती है, जहां व्यापारियों का माल सड़क पर ही खाली किया जाता है, इससे रास्ते बंद होने के साथ लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। घरों में ही व्यापारियों ने गोदाम बना रखे है, जिन पर न तो पुलिस कार्रवाई कर रही है और नहीं नपा। जबकि ट्रांसपोर्ट नगर विकसित होने के साथ कभी संचालित ही नहीं किया गया।

सरिया लेकर जाती ट्रैक्टर-ट्रॉली।

घंटों सड़कों पर खड़े रहते हैं ट्रक

शिवपुरी रोड पर बने पुराने ट्रांसपोर्ट नगर में दिनभर ट्रकों की लाइन लगी रहती है, जिन पर ट्रकों, कंटेनरों व ट्रोलों के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। लंबे वाहन होने के साथ यह कंटेनर पूरी सड़क व घरों के दरवाजे तक घेर लेते है। ऐसे में लोगों को घरों से बाहर निकलना भी दूभर हो जाता है। एक ही जगह पर रोजाना 50-60 ट्रक आते-जाते है, ऐसे में सड़कों पर कई बार ट्रकों के खड़े होने से रास्ते ही बंद हो जाते है, जो दूसरों के लिए मुसीबत बन जाते है। स्थित खराब होने के बाद भी पुलिस उन्हें टोकने तक के लिए नहीं पहुंचती।

ट्रैक्टर-ट्रॉली व अन्य भारी वाहनों पर नहीं लगाई जा रही रोक

शहर में ट्रक और ट्रोले ही शहर में नहीं घुस रहे है, बल्कि बेकाबू तरीके से ट्रैक्टर भी शहर में फर्राटे भर रहे है। जिनमें माल के साथ सवारियों को लाद लाकर लाया ले जाया जा रहा है। जिससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ रही है। पूर्व में एसपी ने एक्सीडेंट को लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर फसलों के अलावा सवारी व माल भरने पर रोक लगा दी थी, जबकि ऐसे करने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के मालिकों पर जुर्माने की कार्रवाई की थी, लेकिन इस साल पुलिस ने इसे लेकर कोई कदम नहीं उठाया। जिससे वाहनों पर लगाम नहीं लग पा रही है और लोडिंग से लेकर बाजारों में ट्रैक्टर-ट्रॉली आसानी से फर्राटे भर रहे है।

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