जिले में 50 से अिधक स्कूल बसों में नहीं लगाए कैमरे व जीपीएस
स्कूलों में नया सत्र शुरू हो चुका है लेकिन एक बार फिर स्कूल बसों में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन और नियमों की अनदेखी से विद्यार्थियों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। जिले में 50 से अधिक स्कूल बसें अब भी सड़कों पर नियमों का उल्लंघन कर चलाई जा रहीं हैं।
छात्राओं के साथ बसों में छेड़छाड़ होना आम बात है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने बसों में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य किया है। ताकि बसों के भीतर विद्यार्थियों और चालक-परिचालक की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सके। स्कूल बसों का टैक्स काफी कम है उसके बावजूद बस संचालक अभिभावकों से मोटा किराया वसूलते हैं। बसों से जाने वाले विद्यार्थियों को घर से लेने के बजाय, मुख्य सड़क पर आने की बात कहते हैं। वापसी में भी विद्यार्थियों को घर से काफी दूर उतार देते हैं। बच्चों को अकेले पैदल ही घर जाना पड़ता है। बसों में छात्राओं की देखरेख के लिए एक महिला पर्यवेक्षक भी नियुक्त करना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए अब तक कई बार आरटीओ कार्यालय निजी स्कूल संचालकों को नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन उसके बावजूद सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हो रहा है। सड़क पर दौड़ रही स्कूल बस कंडम हो चुकी है। दिखावे के लिए हर छह माह में बसों को पेंटकर चमका दिया जाता है, लेकिन भीतर से बसें खस्ता हाल ही हैं।