महिलाएं बोलीं-आदेश के बाद भी खातों में नहीं डाले जा रहे एक-एक हजार रुपए
कुपोषण मिटाने प्रदेश सरकार ने सहरिया परिवारों के महिला मुखिया के खातों में एक हजार रुपए प्रतिमाह देनेे की घोषणा की थी। जिस पर प्रशासन ने जनवरी में अमल करते हुए ऐसे सहरिया परिवारों को भी चिह्नित किया। लेकिन मंगलवार को जनसुनवाई में राड़ेप गांव की आधा सैकड़ा से ज्यादा महिला जनसुनवाई में पहुंची, जिन्होंने आदेश की प्रतियां दिखाते हुए कलेक्टर से खातों में एक-एक हजार रुपए नहीं आने की शिकायत की।
25 दिसंबर को कराहल में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासी वर्ग के लिए कई घोषणाएं की, जिसमें कुपोषण मिटाने के लिए सहरिया परिवार की महिला मुखिया के खाते में एक हजार रुपए जनवरी माह से डाले की घोषणा भी शामिल थी। इस घोषण के बाद संबंधित मंत्रालय ने आदेश जारी किए और प्रशासन ने जनवरी माह से कराहल क्षेत्र के उन सहरिया परिवारों को चिह्नित करना शुरू कर दिया, जिनके बच्चे कुपोषण की जद में थे। ऐसे में कराहल और श्योपुर क्षेत्र से लगभग 43 हजार परिवार चिह्नित किए गए। जिन्हें फरवरी से एक हजार रुपए महीने देना था, ताकि उक्त राशि से वह तेल, मसाला व सब्जी खरीद सकें और कुपोषण से अपने बच्चों को मुक्त सकंे। जिस पर कई परिवारों को उनके खातों में राशि डालने संबंधित आदेश भी पूर्व कलेक्टर पीएल सोलंकी ने गांव-गांव जाकर बांटे। लेकिन मंगलवार को जनसुनवाई में श्योपुर के राड़ेप गांव की आधा सैकड़ा महिलाएं पहुंची, जिन्होंने आदेश की प्रतियां दिखाते हुए खातों में रुपए न आने की शिकायत की। महिलाओं ने कहा कि उन्हें आदेश की प्रतियां सहित अन्य कागजात जैसे ऑनलाइन पंजीयन की कॉपी तक की गई, पर खाते में पैसा मार्च तक भी नहीं आया। इस पर कलेक्टर सौरभ सुमन ने मामले में जांच कर संबंधितों के खातों में राशि डालने के निर्देश दिए।
जनसुनवाई में लोगों की समस्याएं सुनते कलेक्टर।
किसान बोला- साहब, मंडी में नहीं बिक रही फसल
चना-सरसों की खरीदी को लेकर भी जनसुनवाई में शिकायत पहुंची, जिसमें सोंईकलां के बुजुर्ग किसान ने कलेक्टर से शिकायत की। जिसमें किसान ने बताया कि वह 10 अप्रैल से रोजाना जैदा मंडी में जा रहा है, लेकिन उसे खरीदी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। जबकि उसे गलत जानकारी देकर भ्रमित किया जा रहा है। किसान ने बताया कि पहले उसे जैदा मंडी से सोंई भेजा गया, फिर सोंई केन्द्र से उसे मानपुर भेज दिया गया और अब मानपुर जाने पर उसे वापस जैदा मंडी भेजा जा रहा है। उसे पता ही नहीं चला रहा की उसकी सरसों कहा खरीदी जाएगी। जिससे वह परेशान हो गया है। किसान ने जनसुनवाई में यह भी बताया कि कई किसान तो इस परेशानी के कारण सस्ते दामों पर मंडी में व्यापारियों को ही अपनी फसल बेच गए। इस पर कलेक्टर ने सरसों की खरीदी शुरू होने के साथ मैसेज आने की बात कहकर उसे लौटा दिया।
युवक ने सरकारी जमीन का पट्टा कराने की मांग की
जनसुनवाई में पहुंचे युवक ने सरकारी जमीन पर पट्टा मांगा, जिसमें उसने कलेक्टर को अवगत कराया कि उसका परिवार तीन पीढ़ियों से जमीन को जोतता आ रहा है। इसी क्रम में सरकार ने भी पट्टा देने की योजना संचालित की हुई है, ऐसे में उसे भी जमीन पर पट्टा प्रदान किया जाए। जिस पर कलेक्टर ने उससे कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं की है वह उसे पट्टा प्रदान कर सके। सरकार की किसी भी जमीन पर वह पट्टा प्रदान नहीं करेंगे। जिसके बाद युवक निराश होकर जनसुनवाई से लौट गया।
12 बजे से शुरू हुई सुनवाई
कलेक्टर सौरभ सुमन ने पहली बार जनसुनवाई की, जिसमें भी पहले टीएल बैठक ली और उसके बाद जनसुनवाई का कार्यक्रम शुरू किया गया। इस बीच सुनवाई की आस में लोग कलेक्टोरेट परिसर में दो घंटे तक लाइन में लगे रहे। दोपहर 11 बजे से शुरू होने वाली जनसुनवाई दोपहर 12 बजे जाकर शुरू की गई। तब कहीं जाकर लोगों ने नवागत कलेक्टर को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान जनसुनवाई में शौचालय निर्माण, आवास निर्माण, जमीन के कब्जे सहित अन्य शिकायतें पहुंची। जिन्हें निराकरण के लिए संबंधित विभागीय अफसरों को भेज दिया गया।