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मंडप में दूल्हे के इंतजार में बैठी रहीं दुल्हन कुछ जोड़े देरी से आए तो नहीं ले पाए फेरे

3 वर्ष पहले
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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत बुधवार को सामूहिक विवाह सम्मेलन में 426 शादियां कराई गईं। इस दौरान कुछ जगह दुल्हन मंडप में बैठकर दूल्हे का इंतजार करती रहीं तो कुछ दूल्हे फेरों के समय तक पहुंचे ही नहीं। वहीं मंडप में फेरे कराने के लिए जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी, उनके न पहुंचने से दूल्हा-दुल्हन को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके अलावा कुछ मंडप में दूल्हा-दुल्हन के न पहुंचने से अकेले शिक्षक अग्नि प्रज्ज्वलित कर बैठे रहे। उधर, भीड़ की वजह से देरी से आए दूल्हा-दुल्हन को अपनी मंडप ही नहीं मिल पाए। इस कारण उन्हें पूरे समय बाहर ही खड़े रहना पड़ा। दरअसल, सम्मेलन मेें भीड़ अधिक बढ़ जाने से अव्यवस्थाएं हो गईं। परिजनों ने किसी तरह दूल्हा-दुल्हन की शादी की औपचारिकताएं निभाईं और सरकार की तरफ से दी जाने वाली उपहार सामग्री लेकर घर रवाना हो गए।

बुधवार को श्याेपुर बायपास पर हेवी मशीनरी टीनशेड में आयोजित विवाह सम्मेलन में कुल 426 रजिस्ट्रेशन हुए हैं। जिसमें से 392 के ही ऑनलाइन आवेदन हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन होने के बाद ही संबंधित जोड़ों को सामग्री प्रदान की जाएगी। इसके अलावा आवेदन ऑनलाइन न हाेने से जारेला गांव के मनीष वैरवा व सुनीता की सम्मेलन में शादी नहीं हो सकी। इस कारण उन्हें उपहार भी नहीं दिया जा सका।

रस्में कराने के लिए जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई, उनमें से कई के गायब रहने से जोड़ों के फेरों में आई परेशानी

दूल्हा नहीं आया, मंडप पर इंतजार करती रहीं दुल्हन...

मंडप क्रमांक 135 पर दो जोड़े बैठे थे। इनमें नगदी गांव की दुल्हन निशा दूल्हे के इंतजार में थी। लेकिन दूल्हा रामकिशन फेरों के समय नहीं पहुंचा। दुल्हन के पिता दूल्हे वालों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश करते रहे। लेकिन उनका फोन तक नहीं लगा। वहीं इस मंडप में जिस शिक्षक की रस्में कराने के लिए ड्यूटी लगी थी, वह नहीं पहुंचा। इससे दूसरे जोड़े सुनीता व सुनील के फेरे नहीं हो पाए।

दो नाबालिग बेटियों की रोकी शादी, सम्मेलन में एसडीएम से महिला बोली- यहां कई नाबालिग जोड़ों की करा रहे हो शादी

नाबालिगों की शादी रुकवाने पहुंचे एसडीएम।

परिजनों के साथ दुल्हन ने किया दूल्हे का इंतजार: बड़ाैदिया गांव से आई दुल्हन परिजनों के साथ अपने दूल्हे बनवारी के इंतजार में दूर खड़ी नजर आई। राजस्थान के केशपुरिया गांव से दूल्हा व उनके परिजन सम्मेलन में समय पर नहीं पहुंचे।

श्योपुर शहर के वार्ड 11 में रहने वाली संपत्ती बाई सम्मेलन के मंच पर पहुंच गई। उन्होंने एसडीएम से कहा कि मेरी ही बेटी तुम्हें नाबालिग नजर आईं, उसकी शादी रोक दी और यहां खुद बैठकर कई नाबालिगों की शादी करा रहे हो। अगर यहां एक भी शादी हुई तो मेरी लाश मिलेगी। तुमने मुझे समझा क्या है। यह बात सुनकर एसडीएम भी भड़क गए और महिला को डांट दिया। बता दें कि संपत्ती बाई की बेटी मनीषा व सुनीता पुत्री देवीशंकर बैरवा की शादी के लिए आवेदन किया था। लेकिन किसी ने मार्कशीट के आधार पर शिकायत कर दी। जिसमें मनीषा की उम्र 17 साल 5 महीने और सुनीता की महज 12 साल है। दोनों बहनों की शादी रुकवा कर जांच के निर्देश दिए थे।

टीचर नहीं था, परिजन बोले- हमारे लाड़ा-लाड़ी के फेरे पड़वा दो

मंडप क्रमांक 24 पर विवाह की रस्में पूरी कराने के लिए टीचर मौजूद नहीं था। दूल्हा-दुल्हन शिवनारायण व लक्ष्मी अपने परिजनों के साथ अग्नि प्रज्ज्वलित कर बैठे नजर आए। मंडप क्रमांक 206 पर मायपुर गांव के दूल्हा रामलखन और दुल्हन ममता भी शिक्षक के इंतजार में बैठी रहीं। मंडप क्रमांक 217 पर सोनू और ममता की रस्म पूरी कराने सामग्री तक नहीं पहुंची। वेदी के आगे आग जलाकर दूल्हा-दुल्हन बैठे रहे। परिजन लोगों से फेरे पड़वाने का अनुरोध करते नजर आए।

वेदी 114 पर नहीं आए जोड़े शिक्षक सामान सजाकर बैठे

मंडप क्रमांक 114 पर एक भी जोड़ा मौजूद नहीं था। सहायक अध्यापक कैलाश मीणा अकेले सामग्री लेकर बैठे थे। हथेली पर जोड़े का नाम दुल्हन रामकथा और दूल्हा लटूर का नाम लिखकर रखा था। रस्म की जानकारी नहीं होने पर दूसरों से पूछते नजर आए कि सामान का किस तरह उपयोग करना है।

ढूंढने के बाद भी नहीं मिलीं वेदियां, फेरे के लिए बाहर खड़े रहे जोड़े

सोंईकला से मुकेश व कनापुर से रामकथा, उड़ायाता से दिलखुश व सोंई से सोना, कनापुर से लेखराज व उड़ायता से प्रियंका को अपनी वेदी नहीं मिल सकी। मंडप नहीं मिलने से तीनों जोड़े परिजनों के साथ बाहर खड़े रहे। फेरे नहीं पड़ पाने से परिजन लोगों से पूछते नजर आए। इसी तरह दूल्हा-दुल्हन बृजेश व पूजा के फेरे पड़वाने के लिए मंडप क्रमांक 210 नहीं मिल पाई।

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