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सीएम ने पूछा-158 मजरे-टोलों में बिजली क्यों नहीं पहुंच पाई, एसई बोले- वन विभाग डाल रहा अडंगा

3 वर्ष पहले
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सेसईपुरा कूनो रेस्टहाऊस के बाहर लोगों से ज्ञापन लेते सीएम।

यह निर्देश भी दिए

सीएम ने कहा कि जो लोग दिसंबर 2006 से पहले वन-भूमि पर काबिज हैं, उन्हें पट्टा दिया जाएगा। अधिकारी और जनप्रतिनिधि इसका परीक्षण कर लें। इसके संवालिए ग्वालियर-चंबल संभाग में विशेष अभियान चलाया जाएगा।

नशा मुक्ति समिति से जुड़े टुंडाराम आदिवासी ने सीएम से कहा कि हम लोग नशामुक्ति को लेकर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन पुलिस-प्रशासन का जो सहयोग मिलना चाहिए वह नहीं मिल रहा है। पहले तो सीएम ने आदिवासी समाज के नशामुक्ति अभियान की प्रशंसा की फिर कहा कि एसपी साहब, आप इनका सहयोग कीजिए।

सीएम से मिलने पहुंचने व्यापारियों ने मांग ररखी कि मंडी में प्लॉट एलॉटमेंट होने थे। लेकिन 11 साल बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। मंडी बोर्ड कहता है कि नई गाइडलाइन से पैसा जमा करो। हमारा पैसा पहले ही जमा है। इस पर सीएम ने कहा कि आपके साथ न्याय होगा।

नाराज भाजपा नेता बोले- पार्टी के जिलाध्यक्ष कलेक्टर हमारे अपमान के लिए जिम्मेदार

सेसईपुरा में आयोजित मुख्यमंत्री की रात्रि चौपाल में प्रवेश न मिलने से नाराज नेताओं ने भाजपा जिलाध्यक्ष और प्रशासन को दोषी ठहराया। जिला पंचायत अध्यक्ष कविता मीणा और जिपं उपाध्यक्ष सीमा जाट ने कहा कि वह कलेक्टर के साथ होने वाली बैठक में पूछेंगे कि उन्हें एंट्री क्यों नहीं मिली। शिवपुरी की पोहरी तहसील में तेंदूपत्ता संग्राहकों को योजना का लाभ देने के बाद रविवार की रात सीएम सेसईपुरा स्थित कूनो गेस्ट हाउस पहुंचे थे। यहां सीएम को आदिवासियों को संबोधित करना था और उनकी समस्याएं सुननी थी। कार्यक्रम में चार जिलों के 300 आदिवासियों को बुलाया गया। लेकिन इस कार्यक्रम में जिपं अध्यक्ष को ही बाहर रोक दिया गया। उन्हें एक घंटे तक बाहर खड़ा रखा गया। जब कार्यक्रम स्थल से कलेक्टर की अनुमति मिली तब जाकर उन्हें भीतर आने दिया गया। इसके अलावा जिपं उपाध्यक्ष को तो जाने ही नहीं दिया। इससे वह नाराज होकर वापस श्योपुर आ गईं। इसी तरह पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ भी यह सलूक किया गया। मालूम हो कि सीएम ने रविवार की रात कूनो गेस्ट हाउस में ही गुजारी। सोमवार सुबह सात बजे भोपला के लिए रवाना हो गए।

जिपं अध्यक्ष का अपमान है

मेरा बिना कई कार्यक्रम प्रशासन करा लेता है, कभी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। सीएम के कार्यक्रम में जाने से भी मुझे रोक दिया गया। यह महिला होने के साथ-साथ एक जिपं अध्यक्ष का अपमान है। कविता मीणा, अध्यक्ष, जिपं श्योपुर

हम सहयोग के लिए गए थे

हम तो सहयोग के लिए गए थे, हमें एंट्री न मिलने से कोई नाराजगी नहीं है, हमारी पार्टी का कार्यक्रम था। जिसमें सीएम साहब को आदिवासियों से चर्चा करनी थी। इसलिए हमने बाहर रहकर सहयोग किया। रामलखन नापाखेड़ली, महामंत्री, भाजपा श्योपुर

प्रशासन की अव्यवस्था रही

यह कार्यक्रम सिर्फ आदिवासियों के लिए था, जिसमें पार्टी के कुछ ही लोगों को भीतर आने की इजाजत थी। अगर कोई दूसरे नेता बिना पास के भीतर घुसे तो यह प्रशासन की अव्यवस्था रही। कार्यक्रम के बाद सब को एंट्री दी गई। अशोक गर्ग, अध्यक्ष, भाजपा श्योपुर

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