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गड्ढों को तालाब के लिए चिह्नित कर बांधी पाल, गड़बड़ी कर निकले लाखों रुपए

3 वर्ष पहले
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पंचायतों में भू-जलस्तर बढ़ाने के साथ-साथ गांवों में पेयजल संकट से निपटने के लिए तालाबों का निर्माण कराया गया था। जिसमें 2017-18 में 74 तालाब 5.51 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए। लेकिन इनमें से आधे से ज्यादा तालाब ऐसे है, जिन्हें खोदा ही नहीं गया, बल्कि सरकारी जमीनों पर हो रहे बड़े गड्ढों को ही तालाब के लिए स्थान चुनते हुए इनके चारों ओर पाल बांध दी गई और खुदाई व पाल के नाम पर लाखों रुपए की राशि निकाली गई। पंचायतों में 2018-19 में एक बार फिर से तालाबों का निर्माण कराया जाना है। जिसमें 500 नए तालाब बनने है, इनमें में भी ऐसे गड्ढों को चुन लिया गया है, जिनमें पाल बांधकर उन्हें तालाब बना दिया जाएगा। इन तालाबों के लिए प्रति तालाब 10 से 15 लाख रुपए की राशि मनरेगा मद से खर्च की जाएगी।

मुझे इस संबंध में जानकारी नहीं है

मुझे इस संबंध में जानकारी नहीं है, अगर तालाब निर्माण के कामों में गड़बड़ी की गई है तो पंचायतों का रिकॉर्ड देखा जाएगा। जिसमें स्थल निरीक्षण भी करेंगे। गड़बड़ी सामने आई तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। नए तालाबों में ऐसा न हो, इसके लिए मॉनीटरिंग की जाएगी। सौरभ कुमार सुमन, कलेक्टर, श्योपुर

कराहल के मॉडल स्कूल के पास बनाया गया तालाब।

पुराने तालाबों को फिर से नया बनाने की तैयारी

कराहल के अधिकतर गांवों में तालाब निर्माण में धांधली गई, जिनमें पुराने तालाबों व गड्ढों को ही तालाब दर्शा दिया गया। इनमें बदरेठा गांव का भी तालाब शामिल है। जिसे एक बार फिर नए सिरे तालाब बनाने की तैयारी चल रही है। इसे इस वर्ष में फिर से तालाब चुना गया है। जनपद के बाबू ने नाम छिपाने की शर्त पर बताया कि बदरेठा गांव में तालाब बनाने के लिए फिर से पुराने तालाब को चुना गया है, हालांकि यहां अभी काम चालू नहीं हुआ है। लेकिन सूची में इसका नाम फिर से आ गया। इसी तरह निचली खोरी और ऊपरी खोरी में भी पुराने तालाब व गड्ढों को फिर से तालाब बनाने के लिए चुना गया है। जिन्हें 200 नए तालाबों में शामिल किया जा रहा है। इस तरह 20 से ज्यादा गांवों में फिर से पुराने तालाबों को नया बनाने की कवायद की जा रही है। जबकि तालाब नए बनने है। इसमें एक तालाब की लागत से 5 से लेकर 10 लाख रुपए तक है।

3 कराहल के मॉडल स्कूल के पास ही गड्ढे की बांधी पाल

कराहल पंचायत में मॉडल स्कूल के पास ही बने बड़े गड्ढे को पंचायत की ओर से तालाब का नाम दे दिया गया। जिसके लिए ट्रैक्टर और जेसीबी के माध्यम से जंगल की खोदी गई मुरम-मिट्टी से पाल बांध दी गई। इस तालाब के लिए पंचायत ने 10 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च किया और गड्ढे को तालाब का नाम देते हुए राशि का भुगतान करा लिया। कराहल के रामजीलाल आदिवासी ने बताया कि पाल बंधने के बाद भी उक्त तालाब में पानी नहीं रूका क्योंकि पाल कमजोर थी और कई जगह से गड्ढे का रिसाव था, इसमें पाल को सिर्फ सड़क के सामने की ओर से बांधा गया है, ताकि इसे देखने पर तालाब दिखे, बाकी इसमें तालाब जैसा कुछ है नहीं।

कलमी गांव में भी गड्ढे में खर्च कर दिए 5 लाख

शिवपुरी-श्योपुर हाईवे पर ही मारवाड़ी ग्रामीणों का गांव है कलमी। जहां कुआं भी बना हुआ है। गांव के लोग पीने का पानी इसी कुएंं से भरते है। इस कुएं के पास ही जंगली क्षेत्र की जमीन लगी हुई है। कुए पास बड़ा गड्ढा है, जिसे ही पंचायत ने तालाब बना दिया। इसमें आगे की ओर मुरम-मिट्टी की पाल बांध दी गई और इसके तो जीर्णोद्वार पर भी काम किया गया। जिसमें 5 लाख रुपए तक की राशि खर्च कर दी गई। लेकिन खुदाई न होने से इसमें भी पानी नहीं रूक सका। शंकर मारवाड़ी ने बताया कि पहले दो तालाबों के लिए निर्माण की बात चल रही थी लेकिन, पंचायत ने पुराने तालाबों को ही दर्शाकर राशि निकाल ली।

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