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ग्रामीण बोले- किसानों पर बिजली चोरी के केस दर्ज कर दिए, अधीक्षक से सीएम बोले-किसानों को परेशान न करें

3 वर्ष पहले
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पोहरी के जनकल्याण कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्योपुर के सेसईपुरा के गेस्ट हाउस में रविवार की रात 8 बजे से रात्रि चौपाल लगाई। इस चौपाल में आदिवासियों को रिझाने की कोशिश की गई। लेकिन जितने आदिवासी बुलाए गए थे, उतने आए ही नहीं। करीब पचास आदिवासियों से सीएम ने सीधा संवाद किया। आदिवासियों ने सीएम से कहा कि उन्हें अनाप-शनाप बिजली के बिल दिए जा रहे हैं। बिजली कंपनी के अफसर किसानों पर केस दर्ज कर रहे हैं। इस पर सीएम ने वहां मौजूद बिजली कंपनी के एसई आरपी बिसारिया को तत्काल तलब किया। उनसे कहा कि आपने किसानों पर जो एफआईआर की हैं, वो गलत हैं। आप अनाप-शनाप बिल देना बंद कर दें। चुनाव के पहले एक मीटिंग और लूंगा, उसमें सभी से पूछूंगा कि आकलित खपत के बिल देना बंद हुए या नहीं। यदि शिकायत मिली तो कार्रवाई होगी। सीएम ने कहा कि जुलाई में लंबे-चौड़े बिलों के झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए नई व्यवस्था कर रहा हूं। जिसमें एक टीवी, एक पंखा और एक एलईडी जलाओगे तो दो सौ रुपए ही बिल आएगा। ग्रामीणों ने पानी और जमीन पर कब्जों से संबंधित शिकायतें भी कीं। यह रात्रि चौपाल रात 10.30 बजे तक चली।

रविवार की रात कूनो गेस्ट हाऊस के बाहर पास लेकर खड़े ग्रामीण, जिन्हें अंदर नहीं जाने दिया।

पास होने के बाद भी ग्रामीण बाहर खड़े रहे

इस चौपाल में उन्हीं लोगों को प्रवेश दिया गया, जिनके पास कलेक्टर और गांव के सरपंचों द्वारा जारी किए गए पास थे। इस वीआईपी व्यवस्था के चलते कई ग्रामीण मुख्यमंत्री को अपनी समस्या नहीं बता पाए। कई लोग दूरदराज के गांव से पीने के पानी से संबंधित समस्याएं लेकर आए थे, लेकिन उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। इस चौपाल में कई भाजपा नेताओं को भी प्रवेश का मौका नहीं मिला। इसमें भाजपा के जिला महामंत्री रामलखन नपाखेड़ी और जिला पंचायत उपाध्यक्ष सीमा जाट को भी बाहर से ही लौटना पड़ा। इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष कविता मीणा की भी गाड़ी पुलिस ने रोक दी। बाद में कविता मीणा तो अंदर तो चली गईं लेकिन उनके ससुर और वरिष्ठ भाजपा नेता मूलचंद्र मीणा को करीब 20 मिनट तक गेट पर ही खड़ा रहना पड़ा। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की भीतर अफसरों की गुहार के बाद अध्यक्ष के ससुर को भीतर एंट्री मिली। हालांकि रात को बैठक खत्म होने के बाद बाहर खड़े कुछ ग्रामीणों को भोजन के लिए अंदर बुलाया गया।

7 किमी दूर पानी भरने जाते हैं

हम 7 किमी दूर पानी भरने जाते हैं। पीने के पानी की एक बूंद भी हमें नसीब नहीं है। ऐसे में हम अपनी व्यथा सीएम को सुनाने के लिए आए थे, लेकिन हमें अंदर ही जाने नहीं दिया गया। ये आरोप ममता कुशवाह, संतो कुशवाह, हप्पू और उसके साथ आए ग्रामीणों ने लगाए।

भाजपा के जिला महामंत्री और जिला पंचायत अध्यक्ष को भी सुरक्षाकर्मियों ने रोका बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष तो चली गईं लेकिन अध्यक्ष के ससुर को 20 मिनट तक करना पड़ा अनुमति का इंतजार।

ग्रामीणों केे बिजली कंपनी पर आरोप

रात को आठ बजे से सेसईपुरा गेस्ट हाउस में शुरू हुई मुख्यमंत्री की रात्रि चौपाल में ग्रामीण बोले कि किसानों पर बिजली कंपनी ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। उनके कनेक्शन काटे गए। इस पर सीएम ने कंपनी के अधीक्षक बिसोरिया से कहा कि गलत कार्रवाई न करें।

बड़ा सवाल: जनता को अपने नेता से मिलने के लिए प्रशासन ने पास का सिस्टम क्यों बनाया

ऐसा पहली बार देखने में आया है कि मुख्यमंत्री की रात्रि चौपाल में पास का सिस्टम किया गया। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में सरंपचों के माध्यम से पास बांटे गए, जिसमें सरपंचों ने अपने विश्वास के लोगों को पास देकर अंदर बुला लिया। लेकिन कई लोग पास होने के बाद भी मुख्यमंत्री को अपनी व्यथा सुनाने अंदर प्रवेश नहीं पा सके। इसके अलावा जिला प्रशासन ने भी भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पास बाटें, जिसमें भाजपा के कई कार्यकर्ता और नेता भी जिला प्रशासन से नाराज हो गए। ग्रामीणों ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने आम लोगों से मिलने के लिए चौपाल लगाई तो उसमें वीआईपी व्यवस्था क्यों लागू की गई।

सांसद से नहीं दिखी विधायक की नजदीकियां

पोहरी में आयोजित हुए इस श्रमिक सम्मेलन में श्योपुर सांसद अनूप मिश्रा के साथ श्योपुर विधायक दुर्गालाल विजय भी शामिल हुए। लेकिन मंच पर दोनों के बीच दूरियां ही दिखीं। ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में स्थानीय भाजपा नेताओं ने सांसद अनूप मिश्रा की जगह कोटा के सांसद ओम बिरला से बिजली सब स्टेशन का भूमिपूजन करवा दिया था। इसके बाद से अनूप मिश्रा नाराज चल रहे हैं।

सीएम ने विवाद सुलझाने बुलाई नेताओं की बैठक

पोहरी के कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने श्योपुर के सेसईपुरा में रात्री चौपाल लगाई। इसके बाद रात्रि विश्राम के लिए मुख्यमंत्री को कूनो रेस्ट हाउस में रुके। यहां सिर्फ श्योपुर के भाजपा नेताओं को बुलाया गया है।

चाहे भूखे रहो, पर बच्चों को जरूर पढ़ाओ

श्योपुर और शिवपुरी जिले में आदिवासी समाज शराबबंदी को लेकर बेहद सजग है। इसे लेकर सीएम ने कहा कि शराब पीना छोड़ दें। साथ ही कहा कि बच्चों की पढ़ाई भी जरूरी है। चाहे भूखे रहो, लेकिन बच्चों को पढ़ाने में कोई कसर न छोड़ो।

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