बालिका को स्वस्थ बनाने के लिए खून की कमी दूर करना जरूरी : सुपरवाइजर
बालिकाओं को स्वस्थ बनाने के लिए हमें उनके भीतर की कमियों को दूर करना होगा। इसमें सबसे ज्यादा खून की कमी की शिकायत है। जिसमें किशोरी-बालिकाओं में विकास की कमी होती है। ऐसा नहीं है कि, यह सिर्फ बालिकाओं में ही है, यह किशोरों में है। जिसके लिए आयरन टेबलेट दी गई है। यह बातें प्रशिक्षण के तहत सुपरवाइजर सुषमा सोनी ने आंगनबाड़ी केन्द्र पर कहीं।
सुषमा सोनी ने अपने सेक्टर से हर आंगनबाड़ी केन्द्र पर देकर प्रशिक्षण आयोजित किया, जिसमें गांव की महिलाओं को भी बुलाया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें एनीमिया यानी खून की कमी की बीमारी के बारे में बताया गया। जिसमें शरीरिक विकास कैसे रूकता है और कमजोरी कैसे आती है। इस बारे में समझाया गया। जिसमें हरेक आंगनबाड़ी पर टेबलेट के पैकेट बांटे गए ताकि, एनीमिया ग्रसित महिलाओं व गर्भवती सहित बालिकाओं को यह दवा दी जा सके। सेक्टर सुपरवाइजर सुषमा सोनी ने गर्भवती महिलाओं को सेहत की देखभाल के तौर तरीके समझाने के साथ ही प्रसव से पहले और प्रसव के बाद बरती जाने वाली सावधानियों से अवगत कराया। इस दौरान कुपोषण नियंत्रण को लेकर रणनीति पर विचार किया गया। कार्यक्रम के दौरान सेक्टर सुपरवाइजर ने उपस्थित महिलाओं को बताया कि गर्भकाल में भारी वजन उठाने और ज्यादा मेहनती काम से बचना चाहिए। धात्री माताओं को 9 माह से लेकर 2 साल तक के बच्चे को बढ़ती उम्र के साथ दैनिक आहार में बढ़ोतरी करना शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए जरूरी है। अभियान के तहत बांटी जाने वाली दवाओं यानी आयरन टेबलेट का वितरण किया गया।