हड़ताल पर बैठे रोजगार सहायक।
आवेदनों का नहीं हो रहा निराकरण
ग्राम पंचायतों में बीपीएल कार्ड से लेकर मतदाता सूची सहित अन्य कामों की जिम्मेदारी भी रोजगार सहायकों पर है। जिसमें पंचायतों में लोगों के बीपीएल कार्ड से लेकर मतदाता सूची में संशोधन व आवासों के आवेदन भी अटक गए है। जिनमें लोग कच्चे घरों को पक्का बनाने के लिए आवेदन कर चुके है। अब इन आवेदनों पर रोजगार सहायकों के हड़ताल पर चले जाने से जांचें अटक गई है। जिससे आवास, पेंशन और बीपीएल के आवेदन लंबित पड़े हुए है।
पंचायतों में लंबित है 7 हजार मनरेगा के काम
मनरेगा के तहत जिले की 225 पंचायतों में लंबें समय पर से 7 हजार काम लंबित बने हुए है। जिनमें अब तक एक भी निर्माण का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। इन मनरेगा के कामों में 60 हजार मदजूरों को काम देना बताया जा रहा है, जबकि जिले में एक्टिव मजदूर 1.20 लाख है। जिनमें से 60 हजार का काम दिया जा रहा है, लेकिन अब हड़ताल के चलते इन मजदूरों को भी काम नहीं मिल रहा है। नतीजा यह मजदूर भी मजदूरी के लिए दर-दर भटक रहे है। पंचायतों में रोजगार सहायकों ही हड़ताल से पंचायतों के अधिकतर काम प्रभावित बने हुए है।