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जिले में सूखा राहत के काम नहीं हो रहे चालू, गांवों से पलायन कर रहे मजदूर

3 वर्ष पहले
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कराहल तहसील के रानीपुरा अाैर बांकुरी गांव से काम की तलाश में निकले अादिवासी मजदूर।

बड़ौदिया बिंदी से 50 परिवारों ने राजस्थान में डेरा डाला

बड़ौदा तहसील से भी लोगों के पलायन का सिलसिला चल पड़ा है। बड़ौदिया बिंदी गांव से 50 परिवारों ने राजस्थान के मांगरोल एवं छीपाबड़ौद आदि गांव में जाकर डेरा डाल रखा है। गांव में कई घरों के दरवाजे बंद हो गए हैं। 150 घरों की बस्ती में इक्का-दुक्का जवान दिखाई है, अधिकांश घरों में परिवार के बुजुर्ग रह गए हैं।

पंचायतों में नहीं मिला काम ताे 50 हजार मजदूर कर गए पलायन

यह सदी का भयंकर सूखा है। फिर भी सरकार न तो चिंतित है और ना ही सरकार के पास कोई ठोस कार्ययोजना है। आदिवासी अंचल से 50 हजार परिवार पलायन कर गए हैं। सबसे ज्यादा कराहल व विजयपुर के आदिवासी गांवों से पलायन हुआ है। एक भी रोजगार मूलक काम नहीं चल रहा है। कई गांवों में पानी का संकट भी लोगों को घरबार छोडऩे को मजबूर कर रहा है। जिले में मनरेगा के काम जल्द चालू नहीं हुए ताे कांग्रेस पार्टी आंदोलन करेगी। रामनिवास रावत, मुख्य सचेतक मप्र विधानसभा कांग्रेस पक्ष एवं विधायक ,विजयपुर

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