पीटीए टीचरों को फिलहाल राहत नहीं, विधि विभाग ने वापस भेजी फाइल
सरकारी स्कूलों में तैनात 7000 पीटीए शिक्षकों को विधि विभाग ने झटका दिया है। शिक्षा विभाग को विधि विभाग ने पीटीए टीचरों को नियमित करने से साफ इन्कार कर दिया है। शिक्षा विभाग ने पिछले सप्ताह सात हजार पीटीए शिक्षकों को नियमित करने के बारे में विधि विभाग से कानूनी सलाह मांगी थी। इसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट में मुख्य याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने अपनी याचिका वापिस ले ली है। इस पर विधि विभाग ने कहा है कि ये मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। सुप्रीम कोर्ट से सिर्फ पंकज कुमार ने अपनी याचिका वापिस ली है। पवन ठाकुर, राजेश ठाकुर सहित एक अन्य याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। इस स्थिति में विधि विभाग इन टीचरों को नियमित करने की मंजूरी नहीं देगा। विधि विभाग ने शिक्षा विभाग को इसकी फाइल वापिस लौटा दी है। विधि विभाग ने इसमें कहा है कि इस मामले में सुप्रीमकोर्ट में सरकार की आेर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता से सलाह लें। अब शिक्षा विभाग इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सरकार के वकील से सलाह लेगा।
स्टेटस-को से ये हो रहा नुकसान
शिक्षा विभाग ने पीटीए के जिन शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया था वह तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चूके हैं। स्टेटस-को लगा होने के चलते इन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है। वहीं जो टीचर अनुबंध पर आने से वंचित थे उन्हें अभी तक अनुबंध पर नहीं लाया जा सका है।
पीटीए के साथ इन टीचरों का केस भी किया है मर्ज| राज्य के सरकारी स्कूलों में करीब 14000 शिक्षक अस्थाई तौर पर तैनात हैं। इनमें 7000 पीटीए हैं। इसके अलावा पैरा 2200, पैट 3400, ग्रामीण विद्या उपासक 1500 के करीब हैं। हालांकि साढ़े तीन हजार से ज्यादा पीटीए को अनुबंध पर ला दिया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जो केस है उसके अनुसार इन्हें अस्थाई ही माना जाएगा। इसके अलावा 3408 पैट, 2200 के करीब पैरा और 1600 के करीब ग्रामीण विद्या उपासक शिक्षक शामिल है। सात हजार पीटीए शिक्षकों के साथ इन टीचरों के केस को भी मर्ज किया हुआ है।
यहां समझें पूरा मामला
वर्ष 2005 से 2007 के बीच में स्कूलों में पीटीए आधार पर टीचरों की अस्थाई नियुक्तियां हुई थी। वर्ष 2013 में याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने इस मामले को सबसे पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान चहेतों को नौकरी दी गई है जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हिमाचल हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थाई शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इनके लिए पालिसी तैयार कर दी थी। प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही हजारों पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया। इसी दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीमकोर्ट मेंं चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगाते हुए यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। इसके बाद से ये मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।