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ऊर्जा पाॅलिसी: पिछले आवेदकों को नई पाॅलिसी में राहत देगी सरकार, राॅयल्टी के मसले पर मिल सकता है लाभ

3 वर्ष पहले
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जयराम सरकार राज्य ने हाइड्रो क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रस्तावित नई ऊर्जा पालिसी का लाभ उन आवेदकों को भी देने का फैसला लिया है, जिन्होंने हिमाचल में पहले ही प्रोजेक्ट ले रखे हैं। राज्य सरकार मुफ्त रायल्टी के कांसेप्ट को नई पालिसी में बड़ा बदलाव कर सकती है। सूत्र बताते हैं कि ऊर्जा विभाग के आला अधिकारी इसे खत्म करने या बीस साल के बाद इसे लागू करने पर फैसला ले सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला कैबिनेट में लिया जाना है, लेकिन फिलहाल मुफ्त बिजली रायल्टी के रूप में दी जाने वाली शर्त नए निवेशकों को गले नहीं उतर रही है। नए तो दूर जिन्होंने हिमाचल में प्रोजेक्ट ले भी रखे हैं, ऐसे दस से ज्यादा निवेशक प्रोजेक्ट लगाने से इंकार कर रहे हैं। इसलिए सरकार ने फैसला लिया है कि नई पालिसी में जो भी राहत मिलेगी, वह उन निवेशकों पर भी लागू होगी। इन निवेशकों ने प्रोजेक्ट मिलने के बावजूद राज्य में इन्हें लगाने से इंकार कर दिया है। दस से ज्यादा निवेशकों ने राज्य सरकार से अपफ्रंट मनी वापस मांगी है। इसकी राशि 500 करोड़ से ज्यादा बनती है। इसलिए सरकार ने नए निवेशकों को आकर्षित करने आैर पुराने के पलायन को रोकने के लिए यह फैसला लिया है। प्रधान सचिव ऊर्जा आरडी धीमान ने माना कि राज्य सरकार ऊर्जा पालिसी में बदलाव का प्रारुप तैयार कर रही है। इसमें निवेशकों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में लाने के लिए राहत प्रदान करने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

5 साल से इस क्षेत्र में नहीं मिल रहे निवेशक

अभी 12 से 30 फीसदी ली जाती है राॅयल्टी
राज्य में बिजली प्रोजेक्टों से अभी तक 12 से 30 फीसदी तक सालाना निशुल्क बिजली रायल्टी के तौर पर ली जाती है। प्रोजेक्ट बना रही कंपनी को पहले बारह साल तक 12 फीसदी, इसके बाद 18 फीसदी आैर 20 साल के बाद 30 फीसदी बिजली रायल्टी के रूप में फ्री ली जाती है।

पांच सालों से हिमाचल आने से गुरेज कर रहे निवेशक| हाइड्रो के क्षेत्र में पिछले पांच साल से बड़े निवेशक हिमाचल नहीं आ रहे हैं। जो निवेशक आए हैं, वह भी प्रोजेक्ट लगाने से इंकार कर रहे हैं। इसका मूल कारण पहले अपफ्रंट मनी को माना गया, इसे सरकार ने कम कर दिया। इसके बाद लीज मनी को घटाया गया। अब रायल्टी को भी लगभग खत्म करने का काम किया जा रहा है। हिमाचल सरकार का हाइड्रो क्षेत्र में दी जाने वाली ये बड़ी आैर अंतिम राहत होगी। इसके बाद सरकार के पास कोई ऐसी राहत नहीं होगी। जिसे खत्म कर सरकार निवेशकों को आकर्षित कर सकेगी।

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