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शिमला-धर्मशाला को स्मार्ट बनाने के लिए निवेशक तलाशना चुनौती

3 वर्ष पहले
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शिमला और धर्मशाला को स्मार्ट बनाने के लिए 1568 करोड़ रुपए का काम पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप ) के आधार पर किया जाना है। यह सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। दोनों शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए निवेशक तलाशने को सरकार को खूब पसीना बहाना होगा। पहले ही प्रदेश में ऐसे कई प्रोजेक्ट है जो पीपीपी मोड पर चलाने की वजह से अधर में लटके हुए हैं। इसमें पर्यटन विभाग कई रोपवे प्रोजेक्ट है जिन्हें सरकार ने पीपीपी मोड़ पर चलाने के लिए कई बार आवेदन मांगे, लेकिन पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रोजेक्टों के लिए निवेशक नहीं मिले। प्रदेश में छह रोप- वे प्रोजेक्ट में से तीन रोप-वे प्रोजेक्ट के लिए सरकार निवेश नहीं ढूंढ सकी। इसके लिए कई बार नियम बदले गए और कई बार टेंडर पर पानी की तरह पैसा बहाया गया। धर्मशाला और शिमला में पीपीपी मोड पर किए जाने वाले काम का बजट अलग अलग तय किया गया है। धर्मशाला के मुकाबले शिमला में पीपीपी मोड पर किए जाने वाले कार्य पर अधिक राशि व्यय की जाएगी। धर्मशाला में 669.92 करोड़ रुपए की राशि तय की गई है जबकि शिमला को स्मार्ट बनाने के लिए 897.80 करोड़ रुपए का बजट निजी सहभागिता के आधार पर खर्च किया जाएगा।

पहले ही रोप- वे के कई प्रोजेक्ट निवेशक न मिलने से नहीं चढ़े सिरे

केंद्र सरकार दोनों शहरों के लिए देगी सिर्फ 500-500 करोड़
केंद्र सरकार ने शिमला और धर्मशाला दोनों शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए अलग अलग बजट स्वीकृत किया है। धर्मशाला के लिए 2105 करोड़ और शिमला के लिए 2906 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट मंजूर किया है। इसमें केंद्र सरकार का शेयर धर्मशाला के लिए 488 करोड़ और शिमला के लिए 487.11 करोड़ तय किए गए है। इसे केंद्र राज्य सरकार को रुपए चरणबद्ध तरीके से जारी करेगा। केंद्र सरकार ने 500-500 करोड़ रुपए का शेयर राज्य सरकार का तय किया है, जो दोनों शहरों को स्मार्ट बनाने पर खर्च किया जाना है। इसके अलावा स्‍थानीय निकायों का शेयर भी तय किया गया है। दोनों शहरों के निकायों को अपने फंड से इसकी व्यवस्था करनी होगी। धर्मशाला के लिए यह फंड 197.92 करोड़ रुपए और शिमला के लिए 520.74 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है। कंटिंजेंसी के तहत 253.85 करोड़ रुपए धर्मशाला के लिए और 348.40 करोड़ रुपए शिमला के लिए तय किया गया है। केंद्र सरकार ने शिमला को स्मार्ट शहर बनाने के लिए प्रोजेक्ट की 18 करोड़ रुपए की पहली किश्त भी जारी कर दी है।

सरकार की कसरत शुरू: धर्मशाला-शिमला को स्मार्ट बनाने के लिए पीपीपी मोड पर भी काम शुरू किया जाएगा। पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप के तहत काम शुरु कराने के लिए सरकार ने कसरत शुरु कर दी है। तरुण कपूर, अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी विकास

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