आउटसोर्स कर्मचारियों की सीएम आॅफिस ने मांगी डिटेल
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी विभागों से हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारियों की डिटेल मांगी है। शिक्षा से लेकर हर विभाग में कैसे इनकी तैनाती हुई, अब इस मसले पर क्या कर सकते हैं। किस कंपनी के माध्यम से तैनाती की है। कंपनी को सरकार की आेर से कितनी राशि दी जाती है, कर्मचारियों को कितनी अदायगी हो रही है। इस मसले पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सीएम आफिस भेजनी होगी। इसके बाद ही राज्य सरकार इस मसले में कैसे अस्थाई कर्मचारियों को राहत देने के लिए रास्ता निकाला जा सकता है। सीएम आफिस में लगातार ही कर्मचारियों या अन्य किसी माध्यम से शिकायतें मिल रही कि कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। सरकार से कर्मचारियों के लिए जितने पैसे दिए जा रहे हैं। कंपनी कर्मचारियों को इससे काफी कम राशि का भुगतान किया जा रहा है। सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर सभी विभागों से डिटेल मांगी है। इन मामलों में कर्मचारियों को मुख्य धारा में लाने के लिए अभी तक किए गए प्रयासों से लेकर विभिन्न अदालतों के मामलों की डिटेल भी तैयार कर भेजनी होगी। इसके बाद राज्य सरकार की आेर से इन कर्मचारियों के लिए क्या किया जा सकता है। इस पर विचार किया जाना है।
एसएमसी शिक्षकों पर भी मांगी है रिपोर्ट
राज्य में एसएमसी शिक्षकों की नियुक्ति किस तरह से हुई है। इसमें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरा करने वालों को स्थान दिया है। इन नियुक्तियों में लिखित या किसी अन्य तरह की परीक्षा का आयोजन नहीं किया था। इन सभी मामलों में शिक्षा विभाग से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रिपोर्ट मांगी है।
पहले वीरभद्र सरकार के समय हो चुकी है लंबी कसरत| हिमाचल में शिक्षा विभाग में तैनात इन शिक्षकों पर पहले भी काफी काम हो चुका है। कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग के माध्यम से हुई है। अभी तक वेतन कंपनी के माध्यम से दिया जाता है। इसके बावजूद इन्हें नियमित करने के लिए साक्षात्कार करने के लिए प्रोसेस शुरू कर दिया था। इस पर न्यायालय के आदेशों के बाद रोक लगी। ऐसी ही स्थिति पीटीए शिक्षकों को लेकर भी ही। इन्हें भी नियमित करने की तैयारी थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में मामला होने के कारण योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। इसी तरह एसएमसी शिक्षकों की तैनाती पूर्व सरकार के समय में बिना लिखित परीक्षा के की गई है। राज्य में आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती सरकारी विभागों, निगम आेर बोर्डों में की गई है। प्रदेश की पंचायतों में बी इनकी तैनाती की गई है। इनकी संख्या 20 हजार से ज्यादा है।