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प्रशिक्षु परिचालकों ने घेरा सचिवालय

3 वर्ष पहले
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एचआरटीसी के प्रशिक्षु परिचालकों ने एक बार फिर से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीते कुछ दिनों से शांत बैठे प्रशिक्षु परिचालकों ने सोमवार को सचिवालय परिसर के बाहर खूब नारेबाजी की। प्रशिक्षित परिचालकों ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर शोषण करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि बीते तीन वर्ष से सरकार प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके करीब 5500 कंडक्टरों के लिए नीति बनाने की बात कर रही है, पर अभी तक नीति नहीं बनाई गई है। ऐसे में अब नई सरकार से उम्मीद है कि वे उनके लिए कोई ठोस नीति बनाएगी। प्रशिक्षित परिचालक संघ के अध्यक्ष नरेश कुमार पठानिया का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया है। ऐसे में अब उनकी आस टूटती जा रही है। यदि नई सरकार ने उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो परिवारों के पालन पोषण करने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेेगा।

इसलिए प्रदर्शनः सरकार ने करीब साढ़े पांच हजार युवाओं को कौशल विकास भत्ते के तहत कंडक्टर का प्रशिक्षण दिया है। 75 दिन का प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद एचआरटीसी ने युवाओं से सेवाएं लेना शुरू कर दिया। उन्हें प्रति घंटे के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। करीब तीन साल से दिन रात काम करने के बावजूद सरकार उनके बारे में सोच नहीं रही है और न ही एचआरटीसी गंभीर है। उनसे दो तीन महीने काम लिया जाता है और फिर घर भेज दिया जाता है।

एचआरटीसी के प्रशिक्षु परिचालकों ने फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

नियमित नौकरी पर रखा जाए इस मौके पर हरीश, विपिन सकलानी, लेखराज, राजकुमार, रूपलाल, सतीश शर्मा, प्रमोद कुमार, सोमराज और राजीव कुमार ने कहा कि एचआरटीसी में कंडक्टरों के सैंकड़ों पद रिक्त हैं। सरकार इन रिक्त पदों को सीधी भर्ती के बजाय प्रशिक्षित कंडक्टरों से भरे। प्रशिक्षुओं की भर्ती जिला स्तर पर ही की जाए। इस तरह पहले काम करवाया फिर छोड़ दिया की नीति को बंद करके प्रशिक्षित कंडक्टरों को नियमित नौकरी पर रखें। जिससे कि वे अपना और अपने परिजनों के भविष्य को सुरक्षित कर सके।

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