- Hindi News
- National
- अभिभावक खुद तय करेंगे कि उनके बच्चों के लिए स्कूल जाने वाले वाहन सुरक्षित हैं या नहीं
अभिभावक खुद तय करेंगे कि उनके बच्चों के लिए स्कूल जाने वाले वाहन सुरक्षित हैं या नहीं
स्कूल वाहनों की चैकिंग के लिए सरकार ने कमेटी गठित कर ली हैं। नूरपुर में हुए स्कूल बस हादसे की पुनरावृति न हो, इस मकसद से सरकार ने सोमवार को कैबिनेट में स्कूल वाहनों की चेकिंग के लिए जिला और उपमंडल स्तर पर कमेटी के गठन का फैसला लिया था। जिला और उपमंडल स्तर पर छह-छह सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। जिला स्तर पर डीसी और उपमंडल स्तर पर एसडीएम कमेटी के चेयरमैन होंगे। खास बात यह है कि अभिभावकों को यह खुद सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल प्रबंधन या उनके द्वारा व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था उनके बच्चों के लिए सुरक्षित है या नहीं। सरकार ने अभिभावकों को यह भी सलाह दी है कि उन्हें चालक या अन्य कर्मचारियों द्वारा किए गए किसी भी उल्लंघन को नोट करना चाहिए और सूचना स्कूल प्रबंधन को देनी चाहिए। मंगलवार को परिवहन विभाग की ओर से कमेटी गठित करने की अधिसूचना जारी की गई।
बसों में लगे होने चाहिए सीसीटीवी कैमरे स्कूल की ओर से छात्रों के लिए जो बसें चलाई जा रही है, उन सब में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए। स्कूल प्रबंधन सुनिश्चित करेगा कि कैमरे हर समय सही रूप से काम कर रहे हैं। जो ड्राइवर नियुक्त किया गया है, उसके पास पांच साल का अनुभव होना चाहिए। बस में महिला गार्ड की भी व्यवस्था करनी होगी।
निजी कान्ट्रैक्ट कैरेज व एचआरटीसी की बसें स्कूलों द्वारा जो बसें किराये पर ली गई हैं, उनका स्कूल के साथ अनुबंध होगा। ड्राइवर अनुबंध की प्रति हमेशा अपने पास रखेगा। गति 40 किमी प्रति घंटे से अधिक नहीं होगी। इन बसों में भी सीसीटीवी कैमरों की भी व्यवस्था आवश्यक है। टैक्सी और मैक्सी कैब के ड्राइवरों का नाम स्कूल प्रबंधन को नजदीक पुलिस स्टेशन में देना अनिवार्य होगा। टैक्सी और मैक्सी कैब का फिटनेस प्रमाण पत्र पहले लेना होगा।
सिटी रिपोर्टर | शिमला
स्कूल वाहनों की चैकिंग के लिए सरकार ने कमेटी गठित कर ली हैं। नूरपुर में हुए स्कूल बस हादसे की पुनरावृति न हो, इस मकसद से सरकार ने सोमवार को कैबिनेट में स्कूल वाहनों की चेकिंग के लिए जिला और उपमंडल स्तर पर कमेटी के गठन का फैसला लिया था। जिला और उपमंडल स्तर पर छह-छह सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। जिला स्तर पर डीसी और उपमंडल स्तर पर एसडीएम कमेटी के चेयरमैन होंगे। खास बात यह है कि अभिभावकों को यह खुद सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल प्रबंधन या उनके द्वारा व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था उनके बच्चों के लिए सुरक्षित है या नहीं। सरकार ने अभिभावकों को यह भी सलाह दी है कि उन्हें चालक या अन्य कर्मचारियों द्वारा किए गए किसी भी उल्लंघन को नोट करना चाहिए और सूचना स्कूल प्रबंधन को देनी चाहिए। मंगलवार को परिवहन विभाग की ओर से कमेटी गठित करने की अधिसूचना जारी की गई।