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कोल डैम से पानी लाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी के अगले ही दिन दिल्ली में भी मिली मंजूरी, टूरिज्म के लिए १८०० करोड़
शिमला के लिए कोल डैम से पानी लाने के लिए राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कंपनी बनाए जाने की मंजूरी के अगले दिन ही केंद्र सरकार ने भी अपनी वित्तीय मंजूरी प्रदान कर दी है। विश्व बैंक से इस प्रोजेक्ट के लिए पैसा लेने से पहले केंद्र सरकार से मंजूरी लेने अनिवार्य था। केंद्र सरकार की मंजूरी से ये साफ हो गया है कि हिमाचल सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए मिलने वाली वित्तीय मदद को हासिल करने के लिए विश्व बैंक की सभी शर्तों को पूरा करता है। क्योंकि केंद्र सरकार से तभी दी है जब हिमाचल सभी शर्तों पर खरा उतरा है। विश्व बैंक ने सरकार के समक्ष पानी की सप्लाई के लिए अलग से कंपनी बनाए जाने की शर्त रखी थी। सोमवार को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलते ही अधिकारी केंद्र की स्वीकृति लेने के लिए सोमवार को ही दिल्ली रवाना हो गए। मंगलवार को दिल्ली में हुई बैठक में 775 करोड़ की परियोजना को मंजूरी मिली है। अब इस प्रोजेक्ट वित्तपोषण के लिए विश्व बैंक को भेजा जाएगा। अधिकारियों ने केंद्र सरकार को बताया कि राज्य सरकार ने विश्व बैंक की तय शर्तों के तहत कंपनी बनो का फैसला लिया है। इस संबंध में अधिकारियों ने पूरे दस्तावेज भी पेश किए।
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन विभाग के 1800 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। अब यह प्रोजेक्ट वित्तीय मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा जाएगा। यहां से इस प्रोजेक्ट को वित्तपोषण के लिए एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) को भेजा जाएगा। इस प्रोजेक्ट के स्वीकृत होने के बाद प्रदेश में नए पर्यटन स्थल विकसित किए जाएंगे। मंदिर सर्किटों का निर्माण किया जाएगा।
775 करोड़ के कोलडैम प्रोजेक्ट के लिए अलग कंपनी बनाना था जरूरी तभी अागे बढ़ सकता है प्रोजेक्ट
विश्व बैंक दो बार दे चुका है एक्सटेंशन 775 करोड़ रुपए के लिए प्रोजेक्ट के लिए विश्व बैंक सरकार को दो बार एक्सटेंशन दे चुका है। तीसरी बार के प्रयास के बाद राज्य सरकार केंद्र से इस प्रोजेक्ट को केंद्रीय वित्त मंत्रालय से मंजूर करवाने में कामयाबी हासिल कर सका है। मंजूरी मिल जाने के बाद अब प्रोजेक्ट का कंसेप्ट नोट विश्व बैंक को भेजा जाएगा। कोल डैम से पानी लाने के लिए विश्व बैंक सरकार को दो बार एक्सटेंशन प्रदान कर चुका है। एक्सटेंशन बैंक की शर्तों को पूरा करने की लिए दी गई थी। दोनों बार सरकार को 18-18 महीने की एक्सटेंशन कंपनी और दूसरी अन्य कार्यवाही को पूरा करने के लिए प्रदान की गई थी। किन्हीं कारणों से सरकार इस दिशा में काम नहीं कर पाई थी। प्रोजेक्ट को शुरु करने में देरी होती चली गई। तीसरी बार सरकार ने इस प्रोजेक्ट के प्रति अपनी गंभीरता दिखाई और विश्व बैंक की शर्तों को पूरा करने की अपनी सारी औपचारिकताओं को पूरा किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक्सपर्ट करेंगे काम योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए शहरी विकास विभाग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों की तैनाती करेगा। इसके लिए ग्लोबल टेंंडर काॅल किए जाएंगे। विशेषज्ञों की तैनाती के लिए विश्व बैंक ने सरकार को अनिवार्य किया है। एसीएस तरुण कपूर ने बताया कि कौल डैम से पानी लाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने भी अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।