- Hindi News
- National
- ड्रग माफिया से घूस लेने के आरोपी एएसपी और हेड कॉन्स्टेबल के बैंक खातों की जांच शुरू
ड्रग माफिया से घूस लेने के आरोपी एएसपी और हेड कॉन्स्टेबल के बैंक खातों की जांच शुरू
ड्रग माफिया से रिश्वत लेने के आरोपों की चपेट में आए पूर्व एएसपी मदन लाल कौशल और हेड कॉन्स्टेबल बृज भूषण के बैंक खातों की जांच शुरू हो गई है। स्टेट सीआईडी की जांच में दोनों की ड्रग माफिया से मिलीभगत के बाद ये कार्रवाई की गई है। एएसपी और हेड कॉन्स्टेबल के ऊना जिले में सेवाएं देने के दिनों से ही इन दोनों के बैंक खाते खंगाले जा रहे हैं। सीआईडी ने बैंकों से ट्रांजेक्शन डिटेल जुटानी शुरू कर दी है। एएसपी और हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट में केस दर्ज है। एएसपी मदन लाल कौशल ने 17 फरवरी 2016 को ऊना में ज्वाइन किया था। 30 सितंबर 2017 को उनका तबादला यहां से दूसरी जगह किया गया। डेढ़ साल तक वे ऊना जिले में तैनात रहे हैं। हेड कॉन्स्टेबल बृजभूषण भी यहां लंबे समय तक तैनात रहा है। ड्रग माफिया ने एएसपी को 25 हजार और हेड कॉन्स्टेबल को चार हजार रुपए हर महीने घूस देने का आरोप लगाया है। हालांकि, ड्रग माफिया के आरोपों की सच्चाई का पता जांच पूर्ण होने के बाद सामने आएगा। एएसपी और हेड कॉन्स्टेबल पर लगाए रिश्वत के आरोपों को डीजीपी एसआर मरडी ने गंभीरता से लेकर केस सीआईडी को सौंपा। केस की जांच एसपी सीआईडी क्राइम संदीप धवल कर रहे हैं।
परिवार के खातों की भी हो सकती है जांच अगर एएसपी और हेड कॉन्स्टेबल के बैंक खातों में कुछ नहीं निकलता है तो सीआईडी परिवार वालों यानि आरोपियों की प|ियों व अन्य सदस्यों के खातों की भी जांच कर सकती है। नशा माफिया ने हर महीने रिश्वत के रूप में हजारों रुपए देने के जो आरोप लगा रहे हैं, वे पैसे किसी ने किसी खाते में तो जमा जरूर किए होंगे।
मोबाइल फोन कब्जे में, जांच शुरू सीआईडी ने एएसपी और हेड कॉन्स्टेबल के मोबाइल फोन कब्जे में लिए हैं। मोबाइल जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। सीआईडी एएसपी और हेड कॉन्स्टेबल की कॉल डिटेल भी निकाल रही है। इससे भी ड्रग माफिया के साथ कनेक्शन की सच्चाई सामने आएगी। जिस तरह से नशे के साथ पकड़े गए आरोपियों ने कहा है कि उनको एएसपी और हेड कॉन्स्टेबल का सहयोग मिलता रहा है, उससे साफ है कि उनके बीच मोबाइल पर भी बातें होती रही होगी। कॉल डिटेल में अगर एएसपी और हेड कॉन्स्टेबल की आरोपियों के साथ संपर्क की बात सामने आती है तो यह रिश्वत केस तक तह तक जाने के लिए अहम कड़ी साबित होगी।
यह है मामला ऊना थाना सदर पुलिस ने 4 अप्रैल को एक कार से 21.83 ग्राम चरस, 6.99 ग्राम चिट्टा , शराब की 12 बोतलें बरामद की थी। पुलिस ने ऊना के अनिल कुमार, अजय कुमार और विशाल को अरेस्ट करके अदालत से रिमांड पर लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस की मिलीभगत का खुलासा किया। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे इस धंधे में काफी समय से शामिल हैं लेकिन इसमें पूर्व एएसपी मदन लाल कौशल और हेड कॉन्स्टेबल बृजभूषण का उनको सहयोग रहा है। इस सहयोग के बदले वे एएसपी को 25 हजार और हेड कॉन्स्टेबल को 4000 हजार प्रतिमाह उनके घर जाकर पहुंचाते थे। इसी वजह से वे पहले नशा सप्लाई करते पकड़े नहीं गए। अभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। प्रदेश में चिट्टा (कोकिन) का जहर पड़ोसी प्रदेशों से ही आ रहा है। सीमाओं पर ऐसे नशे को रोकने को सख्ती की जरूरत है। अगर पुलिस ही इस तरह की ढील बरते तो इस नशे की सप्लाई कैसे रुकेगी।
हेड कॉन्स्टेबल निलंबित, एएसपी पर एक्शन नहीं ड्रग माफिया से रिश्वत लेने के आरोप के ऊना के एसपी दिवाकर शर्मा ने हेड कॉन्स्टेबल बृजभूषण को तुरंत सस्पेंड कर दिया था। लेकिन एएसपी के खिलाफ जांच के अलावा कोई एक्शन अभी तक नहीं लिया गया है। एचपीएस अधिकारी के खिलाफ एक्शन सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। डीजीपी की ओर से एएसपी के रिश्वत केस में फंसने के मामले में पूरी रिपोर्ट 6 अप्रैल को ही सरकार को भेज दी गई थी। सरकार ड्रग माफिया के खिलाफ कार्रवाई के दावे पर दावे कर रही है, लेकिन एएसपी रैंक के अफसर के ड्रग माफिया के साथ मिलीभगत के आरोपों पर सरकार चुप्पी साधे हुए है।