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अंग्रेजों के समय की फॉरेस्ट ट्रैक फिर होगी रिवाइव, बुराश पथ से लेकर जलधारा तक जा सकेंगे सैलानी

3 वर्ष पहले
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शहर के बीच ही आधा दर्जन तो बाहर दस से ज्यादा नेचर वाक डेवलप करेगा वन विभाग

भास्कर न्यूज | शिमला

अंग्रेजों की समर कैपिटल शिमला के जंगलों में बनी नेचर ट्रैक को राज्य वन विभाग फिर से विकसित करेगा। राजधानी में एडवांस स्टडी के नीचे से दो किलोमीटर नेचर ट्रैक को दोबारा से रिवाइव किया जा रहा है। इसी ट्रैक को जलधारा के नाम से आगे तीन किलोमीटर बनाया जाना है। शिमला के सटे मशोबरा से खटनोल तक आठ किलोमीटर का नेचर ट्रैक सैलानियों के लिए विकसित होंगे। राजधानी में मालरोड, कुफरी से लेकर अन्य स्थानों पर सैलानी पहुंचते हैं, लेकिन इन्हें शिमला की नेचर दिखाने के लिए विभाग ने ये प्रस्ताव तैयार किया है। राज्य के वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने बुधवार को राज्य सचिवालय में शहर के वनों को बेहतर बनाने के लिए बैठक की। इसमें राज्य वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण कपूर के अलावा राज्य वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इसमें शिमला के लिए अलग से वर्किंग प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

25 करोड़ की लागत के बनेगा वर्किंग प्लान, अलग ही होगा डीएफआे राजधानी के जंगलों को बचाने आैर इसका दायरा बढ़ाने के लिए 25 करोड़ की लागत से प्लान तैयार किया है। इसमें से बीस करोड़ की फंडिंग स्मार्ट सिटी से वनीकरण के लिए की जानी है। इसका प्रस्ताव केंद्र के पास मंजूरी के लिए भेजा है। केंद्र से सहमति मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।

सरकारी जमीन पर लगेंगे पौधे

राजधानी में वनों की जमीन नहीं हैं। सरकारी विभागों की काफी जमीन है, केंद्रीय कार्यालयों के पास भी जमीन है। ऐसी जमीन पर पौधे लगाने के लिए प्लान तैयार किया जाएगा। अगले पांच सालों में शिमला में पौधे लगाने से लेकर इसके सर्ववाइल रेट बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए मंत्री ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। एचएफआरआई की रिपोर्ट के मुताबिक शिमला में अब कौन से पौधे ज्यादा लग सकते हैं। इस पर काम करने के निर्देश बैठक में दिए हैं।

14 हजार 990 पौधे लगाने के निर्देश

इस बार राजधानी में 14 हजार 990 पौधे लगाने का फैसला लिया है। इन पौधों को ऐसे स्थलों पर लगाया जाना है। जहां पर भू स्खलन होता है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ऐसे स्थलों को शीघ्र ही चिंहित किया जाएगा। ऐसे स्थानों पर पौधारोपण कर जमीन को बचाया जा सकता है, इसके साथ ही वनीकरण को बढ़ावा दिया जा सकता है।

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