शिमला | शहरों के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या शिक्षकों से कम या बराबर हो गई है। गांव के स्कूलों मेें बच्चे हैं, लेकिन यहां शिक्षकों की कमी है। इस असंतुलन को खत्म करने के लिए एलीमेंटरी शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों का युक्तिकरण करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाना है।
सरकार की मंजूरी के बाद ही शिक्षकों के युक्तिकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। इस बार स्कूलों को शिक्षक छात्रों की संख्या के अनुपात में मिलेंगे। आरटीई (राइट टू एजूकेशन) के नियमों के तहत 60 छात्रों वाले स्कूलों में दो, 60 से 90 छात्र संख्या वाले स्कूल में तीन शिक्षक आैर इससे ज्यादा छात्र होने पर स्कूल में चार अध्यापक होने अनिवार्य हैं। गांव के स्कूलों में बच्चों की संख्या कहीं ज्यादा है, लेकिन शिक्षकों की यहां काफी कमी है। प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 10 हजार के लगभग है। इन स्कूलों में से शहरों के स्कूलों में बच्चों की संख्या नामात्र ही है। गांव के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या काफी है, लेकिन यहां पर शिक्षक नहीं है। 1000 स्कूलों में तो एक ही शिक्षक है। इन स्कूलों में हालत यह है कि यहां पर पांच कक्षाएं आैर दिन में खाने का प्रबंधन देखना होता है। इससे बच्चों की पढ़ाई खराब हो रही है। निदेशक एलीमेंटरी शिक्षा मनमोहन शर्मा ने माना कि इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाना है। शेष | पेज 7 पर
421 स्कूलों में पूरे नहीं होते आरटीई नियम
421 प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं, जहां पर आरटीई के नियम भी पूरी नहीं हो रहे हैं। इससे साफ है कि यहां पर छात्रों की संख्या ज्यादा है जबकि शिक्षक कम हैं। इसे पूरा करने के लिए युक्तिकरण की योजना तैयार की है। प्रदेश में जेबीटी शिक्षकों का कॉडर 26 हजार का है, इसके बावजूद कई स्कूल एक तो अधिकतर दो के सहारे चल रहे हैं। राजधानी के कई स्कूलों में बच्चों दस तो उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या पांच है। यहां पर एडजेस्टमेंट करवाकर शिक्षक रहते हैं।