पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • एक परमिट पर नहीं ले जा सकेंगे शराब के दस ट्रक

एक परमिट पर नहीं ले जा सकेंगे शराब के दस ट्रक

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हिमाचल में शराब के अवैध कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग ने प्लान तैयार किया है। इसके तहत अब फैक्टरी से शराब ले जाने वाले वाहन का परमिट टाइम बाउंड बनेगा। इस समयावधि के भीतर यदि वाहन शराब लेकर नहीं पहुंचा तो इसकी जानकारी विभाग को मुहैया करवानी होगी। इसमें भी वाहन में तकनीकी खराबी होने पर ही छूट मिल सकेगी। फैक्टरी में तैनात विभाग के अधिकारी की सेल्फी लेनी होगी। इसे विभाग के सभी अधिकारियों को भेज दिया जाएगा। ट्रक के गंतव्य तक पहुंचने पर भी सप्लायर के साथ सेल्फी होगी। वर्तमान में फैक्ट्री से वाहन के लिए परमिट काटा जाता है। इसी परमिट पर एक से ज्यादा वाहन ले जाए जाते हैं। इससे फैक्ट्रियों को तो बिक्री में लाभ हो जाता है, लेकिन सरकार को मिलने वाले राजस्व में नुकसान होता है। ठेकेदारों आैर उत्पादकों की मिलीभगत से सरकार को लग रहे चूने से छुटकारा दिलाने के लिए सरकार ने यह प्लान तैयार किया है। अब एक परमिट पर शराब के दस ट्रक नहीं ले जाए जा सकेंगे।

पहुंचने पर लाइसेंस धारक की ट्रक के साथ होगी सेल्फी

क्यों एक परमिट पर निकाले जाते हैं ज्यादा वाहन

नियमों के तहत फैक्ट्री से शराब बिना परमिट के नहीं लाया जा सकता है। अभी के सिस्टम में राज्य में परमिट बिना किसी समय के जारी किए जाते हैं। इसका फायदा शराब के ठेकेदार उठाते हैं आैर एक ही परमिट पर आठ दस वाहन ले जाते हैं। इससे अन्य वाहनों में लाई शराब बिना टैक्स के ही पहुंचती है। इसके ठेकेदारों को तो सस्ती शराब मिलती है, लेकिन हिमाचल सरकार को राजस्व में नुकसान होता है।

अब 15 किमी प्रति घंटा की स्पीड के हिसाब से कटेंगे परमिट| राज्य में वाहन पहाड़ी राज्य होने के नाते ज्यादा तेजी से नहीं दौड़ते हैं। भार ढोने वाले वाहनों की स्पीड आेर भी कम रहती है। इसलिए विभाग परमिट पर समय की अवधि 15 किमी प्रति घंटा की स्पीड से तय होगी। यदि फैक्ट्री से शराब 150 किमी दूर ले जानी है तो परमिट दस घंटे तक ही वेलिड होगा।

एक्साइज आैर जीएसटी के लिए अलग से होंगी टीमें

राज्य में एक्साइज आैर जीएसटी की कलेक्शन के लिए विभाग ने अलग अलग उड़न दस्तों की टीमें बनाने का फैसला लिया है। अभी उड़न दस्तों की टीमें हैं, लेकिन दोनों ही काम एक ही टीमों से करवाया जा रहा है। भविष्य में इसके बेहतर रिजल्ट आ सके, इसके लिए सरकार की आेर से दोनों के लिए अलग अलग टीमें तैयार की जानी है। प्रदेश को एक्साइज से राजस्व के रूप में 1500 करोड़ सालाना होते है। इसमें दस फीसदी बढ़ोतरी का टारगेट है। इसी दिशा में विभाग की आेर से अलग टीमें बनाई जा रही है।

जीएसटी के राजस्व में कमी

राज्य में वैट आैर जीएसटी के राजस्व में काफी अंतर है। 40 फीसदी से ज्यादा का अंतर आंका गया है। केंद्र की आेर से भी यह मामला सरकार के ध्यान में लाया गया था। इस मसले पर राज्य सरकार ने शीघ्र ही केंद्र को आश्वासन दिया है कि इसमें आने वाले समय में सुधार किया जाएगा।

खबरें और भी हैं...