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स्वां नदी की तरह राज्य में नदियों के तटीकरण का बनेगा प्रोजेक्ट

3 वर्ष पहले
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4 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट बनाने में जुटा विभाग, केंद्र को भेजने की तैयारी

शिमला| स्वां नदी की तरह प्रदेश की अन्य नदियों के खतरे को कम किया जाएगा। बरसात के दिनों में प्रदेश में बहने वाली नदियां जान माल के नुकसान का कारण न बन जाए सरकार ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। नदियों के खतरे को कम करने के लिए सरकार ने नदियों के तटीकरण की योजना तैयार की है। प्रदेश की सभी प्रमुख नदियों के तटीकरण करने की योजना तैयार की जा रही है। इसमें सतलुज, रावी, चिनाब, ब्यास और पार्वती नदियां शामिल है। इन नदियों के तटीकरण के लिए अाईपीएच विभाग चार हजार करोड़ रुपए का एक प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। वित्तपोषण के लिए इस प्रोजेक्ट को केंद्र को भेजा जाएगा। प्रदेश की उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए सरकार ने यह योजना तैयार की है ताकि किसानों की बेशकीमती जमीन को बर्बाद होने से बचाया जा सके।

किनारे बसे शहरों के खतरे को कम करना भी है योजना में: नदियों के तटीकरण का दूसरा बड़ा कारण इनके किनारे बसे शहरों को बाढ़ के खतरे से कम करना है। प्रदेश के ऐसे कई शहर है जो नदियों के किनारे बसे हुए है। प्रदेश में ऐसी कई घटनाएं घट चुकी है जिसके कारण नदियों में बाढ़ के कारण शहर के शहर तबाह हो चुके है। भविष्य में ऐसा न हो इसलिए सरकार नदियों के खतरे को कम करने के लिए नदियों का चैनेलाइजेशन करने की योजना तैयार कर रही है। इससे पहले सरकार सिंचाई की 4700 करोड़ की और पानी की 3200 करोड़ की स्कीमें केंद्र को भेज चुका है।

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