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डीके शिवकुमार कांग्रेस के ऐसे नेता; जिन्होंने देशमुख, पटेल के बाद सियासी दुश्मन कुमारस्वामी को बचाया

3 वर्ष पहले
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कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस विधायकों को टूटने से बचाने में कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार की भूमिका सबसे अहम रही। 2002 में महाराष्ट्र में कांग्रेस की विलासराव देशमुख की सरकार टूटने की कगार पर आ गई थी। ऐसे में देशमुख ने विधायकों को बचाने के लिए कर्नाटक पहुंचे। तब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी। एसएम कृष्णा मुख्यमंत्री थे। तब कृष्णा ने विधायकों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी डीके शिवकुमार को दी थी। वे विधायकों को इगल्टन रिसॉर्ट ले गए और एक हफ्ते तक उन्हें वहां रखा। बहुमत वाले दिन वे इन विधायकों को मुंबई ले गए और देशमुख सरकार बच गई। इस घटना ने उन्हें गांधी परिवार का करीबी बना दिया। वे गौड़ा परिवार से उनके गढ़ में लड़कर ही नेता बने हैं। गौड़ा के खिलाफ उनकी लंबी लड़ाई रही है। शिवकुमार वोक्कालिंगा समुदाय से आते हैं। पहली बार कनकपुरा तहसील के सथनूर से 1989 में चुनाव लड़े थे और पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा के हाथों शिकस्त मिली थी। जब 1990 में एस बांगरप्पा सीएम बने तो उन्होंने शिवकुमार को जेल और होमगॉर्ड विभाग का जूनियर मंत्री बनाया। तब वो महज 29 साल के थे। 1999 में शिवकुमार शहरी विकास मंत्री बने। 2002 में देवगौड़ा के खिलाफ कनकपुरा लोकसभा सीट से लड़े। पर हार गए। 2004 में उन्होंने लोकसभा चुनाव में देवगौड़ा को हराकर बदला लिया। लेकिन राज्य में सरकार हार गई। कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनी। और शिवकुमार बाहर हो गए। 2013 में सिद्दारमैया से अनबन के चलतेे मंत्री पद नहीं मिला। जनवरी 2014 में ऊर्जा मंत्री बनाए गए। कामन दुश्मन गौड़ा की वजह से दोनों एक साथ काम करते रहे। जब भाजपा ने पिछले साल अगस्त 2017 में सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद को राज्यसभा चुनाव हराने के लिए घेरेबंदी की। तब शिवकुमार ने ही गुजरात भाजपा विधायकों को इगल्टन होटल आश्रय दिया था। चुनाव में बहुमत नहीं मिलने पर शिवकुमार ने गौड़ा परिवार से हाथ मिला लिया। तीन दिन तक उन्होंने विधायकों को इगल्टन रिसॉर्ट में रखा। इसके बाद वो बस से विधायकों को हैदराबाद ले गए और फ्लोर टेस्ट से एक दिन पहले वापस कर्नाटक लेकर आए। शिवकुमार लापता चल रहे प्रताम पाटिल और अानंद सिंह को पार्टी में लेकर आए।

इन 5 महारथियों ने 55 घंटे में पलट दी कर्नाटक की सियासत

डीके शिवकुमार कांग्रेस के सबसे अमीर प्रत्याशी

कुल संपत्ति 840 करोड़; 5 साल में 589 करोड़ की दौलत कमाई

डीके शिवकुमार विधानसभा पहुंचने वाले दूसरे सबसे अमीर प्रत्याशी हैं। उनकी कुल संपत्ति 840 करोड़ रुपए हैं। 2013 में जब वो चुनाव लड़े थे तब उन्होंने अपनी संपत्ति 251 करोड़ घोषित की थी। इस लिहाज से पांच साल में उनकी सपत्ति 589 करोड़ बढ़ी। यानी 234% बढ़ी।

, शिमला, रविवार 20 मई , 2018

गुलाम नबी आजाद

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भरोसमंद गुलाम नबी आजाद ने ही जेडीएस को समर्थन देने का ऐलान किया और जेडीएस को सरकार बनाने के लिए मनाया। इसके बाद ही कांग्रेस-जेडीएस ने मिलकर शाम को गवर्नर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया गया था।

सिद्धारमैया| कर्नाटक के पूर्व सीएम रहे सिद्धारमैया ने 15 मई को मतगणना के प्रारंभिक रूझानों से लेकर अंतिम समय तक मोर्चा संभाले रखा। शाम तक स्थिति जब भाजपा के खाते में नहीं जाती दिखी तो इन्होंने पार्टी के विधायकों को सुरक्षित रखने का जिम्मा उठाया ताकि ये टूटकर भाजपा में न जा सकें। जेडीएस के नेताओं से सामंजस्य की जिम्मेदारी भी इन्हाेंने ही संभाले रखी।

अशोक गहलोत

कांग्रेस में राहुल के सबसे करीबी नेताओं में अशोक गहलोत भी हैं। उन्होंने कर्नाटक की लड़ाई को विचाराधारा और सिद्धांतों से जोड़ा और जेडीएस को कांग्रेस से गठबंधन कराने में सफल साबित हुए। कुमारास्वामी ने भी भाजपा से दूरी बनाई और पुराने कालिख को धोने की बात तक कह डाली।

शर्मा ट्रैवल: विधायकों को लाने जाने में कांग्रेस इसी पर भरोसा जता रही है

कांग्रेस ने विधायकों को लाने-ले जाने में शर्मा ट्रैवल की बसों पर भरोसा जताया। ये कांग्रेस की वफादार ट्रांसपोर्टर डीपी शर्मा की बसें हैं। राजस्थान के धनराज शर्मा 1980 से दक्षिण की राजनीति में एक्टिव थे। शर्मा ने 1998 में कांग्रेस टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। पर हार गए थे। धनराज शर्मा का 2001 में निधन हो गया। अब बेटे सुनील कुमार शर्मा कंपनी चलाते हैं। राज्य में पहले विलास राव देशमुख और उनके विधायकों को भी लाने ले जाने में इन्हीं बसों का इस्तेमाल किया गया था।

मल्लिकार्जुन खड़गे

लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक में पार्टी के दलित चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं। मतगणना के दिन सिद्धारमैया के दलित सीएम वाले बयान पर इन्होंने खुद आगे आकर इसे नकार दिया। हालांकि यही किस्सा आगे जाकर जेडीएस को जोड़ने में काफी सफल साबित हुआ।

30 साल से गौड़ा परिवार से लड़ रहे हैं शिवकुमार; देवगौड़ा से दो हार के बाद उन्हें हरा चुके हैं

सबसे कम समय के सीएम

येद्दियुरप्पा बने 2 दिन के सीएम, जगदंबिका पाल की बराबरी

देश के सबसे कम दिन के सीएम

2 दिन

येद्दियुरप्पा

कर्नाटक (2018)

5 दिन

ओपी चौटाला

हरियाणा (1990)

7 दिन

नीतिश कुमार

बिहार (2000)

23 दिन

रामचंद्र जानकी

तमिलनाडु (1998)

बेंगलुरू | कर्नाटक में भाजपा के सीएम बीएस येद्दियुरप्पा ने सबसे कम वक्त सीएम रहने का रिकॉर्ड बनाने वाले जगदंबिका पाल की बराबरी की। मौजूदा भाजपा सांसद जगदंबिका पाल 1998 में कांग्रेस की ओर से यूपी के सीएम बने थे। दरअसल, लोकतांत्रिक कांग्रेस ने कल्याण सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।

2 दिन

जगदंबिका

उत्तर प्रदेश (1998)

7 दिन

येद्दियुरप्पा- भाजपा

कर्नाटक (2007)

11 दिन

एससी मारक

मेघालय (1998)

30 दिन

बीपी मंडल

बिहार (1968)

05

4 दिन

सतीश प्रसाद सिंह

बिहार (1968)

4 दिन

सतीश - एसएसपी

बिहार (1968)

16 दिन

ओपी चौटाला

हरियाणा (1998)

येद्दियुरप्पा दो बार में 2 और 7 दिन सीएम रहे हैं।

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