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पहले सौ पेड़ों से अच्छी लकड़ियां छांटी, फिर बनाया सोफा, कीमत Rs. 25 लाख

3 वर्ष पहले
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ऐतिहासिक बैंटनी कैसल में लगे हस्त शिल्प मेले में प्रदर्शनी को देखने के लोगों व पर्यटकों की भीड़ उमड़ी है। इस प्रदर्शनी में शीशम की लकड़ी का बना सोफा, जिसकी कीमत 25 लाख रुपए रखी गई है। लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है। घुमारवीं के मतवाणा गांव से आए कलाकार मनसाराम ने इस सोफे को प्राकृतिक रूप से बेकार पड़ी लकड़ी से तैयार किया गया है। इसके मोड़ पर कोई जोड़ नहीं है।

शीशम के 100 तरह के पेड़ तराशने के बाद यह तराशा गया है, जिसकी कीमत 25 लाख रुपए रखी गई है। इस सोफासेट पर चार लोगों के बैठने की कैपेस्टी है। जूट की रस्सी से इसे बुना गया है। मनसाराम का कहना है कि अगर लोग इसे संभाल के चलाएं तो यह कम से कम 100 साल तक चल सकता है। पिछले 40 साल से इस काम को कर रहे हैं। इस सोफासेट को 2012 में बनाकर तैयार किया है।

25 लाख कीमत के तैयार सोफासेट के साथ कारीगर मनसाराम।

कोई भी मूर्ति नहीं बिकी

चंबा से आए हस्तशिल्प मूर्तिकार हरदेव के चेहरे पर मायूसी है कि चंबा से इतनी दूर शिमला तो आ गए है, लेकिन अभी तक उनकी एक भी मूर्ति नहीं बिकी है। यह जो मूर्ति बनाते है वह पत्थर ,सीमेंट व लकड़ी पर बनाते है । हरदेव की ज्यादा कर मूर्तियों के ऑर्डर मंदिर में रखने के लिए बनाने के ही आते है। बिलासुपर के हीरापुर पंचायत कसेग गांव के प्रेमसिंह ने प्राचीन ऐतिहासिक पुल जाे मग्न हो चुका है थर्मोकोल से बनाया है। मंडी और हमीरपुर को जोड़ने वाला कई जमाने पहले का यह पुल आज नहीं है। लेकिन इसकी यादें आज भी ताजा करती है,इस पुल के ऊपर से राजा शिकार के लिए जाते थे,इसके अलावा रानी को पालकी से लेकर इस पुल से जाते थे। इसके साथ अन्य पत्थर की शिवजी की मूर्तियां बनाई है। मेले में किन्नौरी शॉल, टोपियां, पीतल की बनी चीजों की खूब मांग रही। वहीं चंबा चप्पल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी है।

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