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सिरमौर की पहली पंचायत डिलमन, 3100 की आबादी में यहां कोई नहीं है गरीब

3 वर्ष पहले
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सिरमौर की डिलमन पंचायत की आबादी करीब 3100 है, आधा दर्जन गांव व उपगांव वाली इस पंचायत में कोई गरीब नहीं है। गत वर्ष तक इस पंचायत में 39 परिवार बीपीएल सूची में थे। इन सभी लोगों ने स्वेच्छा से बीपीएल सूची से अपना नाम कटवा लिया। यहां के गांव के लोग सरकारी नौकरी के पीछे कम भागते हैं, पंचायत के लोगों ने अपनी आय के लिए कृषि को आधार बनाया है।

2 लाख से ज्यादा है हर परिवार की आमदनी, कृषि पर आधारित हैं आधा दर्जन गांव, एशिया के विभिन्न देशों में सप्लाई होता है यहां का अनारदाना

हर वर्ष 12 से 15 करोड़ के कृषि

उत्पाद विभिन्न मंडियों में भेजे जाते हैं

लोगों के सामूहिक प्रयास रंग लाए। आज यहां पर हर वर्ष 12 से 15 करोड़ के कृषि उत्पाद विभिन्न मंडियों में भेजे जाते हैं। देश ही नहीं विदेशों में भी इस पंचायत में तैयार कृषि उत्पाद भेजे जाते हैं। हालांकि अभी यहां पर केवल अनारदाना ही तैयार कर भेजा जाता है, बाकि अन्य उत्पाद खेतों से निकालकर सीधे ही मंडियों में भेजा जाते हैं। पंचायत को संपन्न बनाने का श्रेय पंचायत प्रधान के अलावा अन्य प्रगतिशील किसानों सहित नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को जाता है, जिनकी प्रेरणा से किसान तरक्की कर रहे हैं।

खुद किए

सिंचाई के प्रबंध

अनारदाना के अलावा कई नकदी फसलों का कारोबार

डिलमन पंचायत में बढयूली, कुज्जी, डिलमन, अरगू, कांगा खोपर, शोगी, कटांजी, सनोग मजलोडी आदि गांव आते हैं। यहां अनार, शिमला मिर्च, टमाटर, फूल गोभी सहित अन्य नकदी फसलें उगाई जाती हैं। पंचायत के लोगों को सबसे अधिक आय अनारदाना व टमाटर से होती है। यहां पर अनार दाना तैयार कर मंडियों में भेजा जाता है। इसका दाम किसानों को पांच सौ प्रतिकिलो तक मिल जाता है, यहां का सबसे छोटा किसान भी साल में करीब 20 हजार से ज्यादा का अनारदाना बेचता है। अन्य किसान 2 से 5 लाख रुपए का अनारदाना तैयार कर मंडियों में भेजते हैं। यहां पर तैयार अनारदाना देश की विभिन्न मंडियों सहित विभिन्न देशों में जाता है। यहां टमाटर भी सबसे छोटा किसान 40 से 50 क्रेट, तो बड़े किसान 100 से 150 क्रेट प्रतिदिन टमाटर सीजन में मंडियों में भेजते हैं। मंडियों में यहां के टमाटर 600 रुपए से 1 हजार रुपए तक बिक जाते हैं।

संपन्न पंचायत डिलमन की खास बात यह है कि सिंचाई के साधनों के लिए यहां के लोग सरकार पर आधारित नहीं रहे। लोगों ने पंचायत में बहने वाले नदी नालों से पानी लिफ्ट कर खेतों तक पहुंचाया। प्राकृतिक जलस्त्रोतों से पानी को खेतों तक पहुंचाया है।

किसानों का कहना | पंचायत के प्रगतिशील किसान संजय कुमार, दुर्गेश दत्त, ओम प्रकाश, चमेल सिंह, मनी राम, चंद्रभान आदि ने बताया कि नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से प्रेरणा पाकर उन्होंने कार्य शुरू किया। आज पंचायत का हर परिवार कृषि को अपनाकर अच्छी आमदनी कमा रहा है।

स्वच्छता में अव्वल| इस पंचायत को संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्रदान किया था। सीसे स्कूल कुज्जी ने संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत देश में पहला स्थान प्राप्त किया था। पंचायत प्रधान पूनम ठाकुर ने बताया कि हाल ही में हुई विशेष ग्राम सभा में सभी 39 परिवारों ने बीपीएल सूची से अपना नाम कटवा लिया है। पंचायत के लोग कृषि व यहां पर लगाए गए पटाखा कारखाने में कार्य कर अच्छी खासी आमदनी कमा रहे हैं।

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