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सुबह ओवरलोडिंग रोकी तो भड़की बस से उतारी सवारियां, दिन भर फिर चलती रहीं भरी हुई बसें

3 वर्ष पहले
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नूरपुर हादसे के बाद सरकार ने हर हालत में सरकारी और प्राइवेट बसों में हो रही ओवरलोडिंग रोकने के निर्देश दिए। इतना बड़े हादसे की गंभीरता के बाद सरकार कुछ हरकत में आई तो अभी तक आंखों के सामने हर रोज ओवरलोडिंग देख रही पुलिस शुक्रवार सड़कों पर दिखीं। पुलिस ने ओवरलोडेड बसों पर सुबह के वक्त कार्रवाई शुरू की तो पहले से सवारियां लेकर शिमला की ओर बढ़ रही बसों ने सूचना मिलने पर यात्री बस से उतार दिए। रोजाना के रूटीन के मुताबिक दफ्तरों या कॉलेजों के लिए निकले छात्र जब बस से उतारे तो उनका गुस्सा सामने आ गया। सवारियां भी ओवरलोडिंग नहीं चाहती लेकिन बसों की कमी के बीच लोगों ने सवाल उठाया कि सरकार और प्रशासन जब ज्यादा बसों का प्रबंध नहीं कर पा रहे तो ओवरलोडिंग रोकने का क्या मतलब। सुबह के वक्त तो ढली और कुछ दूसरे एरिया में ओवरलोडिंग पर कंट्रोल किया। लेकिन दोपहर 12 बजे के बाद शहर की सड़कों पर प्राइवेट बसें फिर ओवरलोडिंग के साथ दौड़ीं। शहर के कई रूटों पर ओवरलोडिंग कर रही इन बसों को रोकने के लिए काेई नहीं था।

भरी बस से ढली में उतारे यात्रियों का सामने अाया गुस्सा
ढली में ओवरलोड प्राइवेट बस में से सवारियों को उतरवाता पुलिस कर्मी।

प्राइवेट बसों के हुए चालान ढली में पुलिस ने एक निजी बस का ओवरलोडिंग करने प न केवल चालान किया बल्कि उसे सवारियां भी नीचे उतार दी। पुलिस ने चालक को दोबारा से ओवरलोडिंग न करने की सख्त हिदायत दी और कहा कि दोबारा पकड़े जाने पर कार्रवाई होगी।

प्राइवेट बसों में दिन में फिर ओवरलोडिंग सुबह-सुबह पुलिस ने भले ही ओवरलोडिंग पर सख्ती की, मगर शाम के समय बसों में फिर पहले की तरह नजारा दिखा। बस स्टैंड से छोटा शिमला, संजौली और संजौली से बस स्टैंड आने वाली बसें आेवरलोड नजर आई। हर बस में क्षमता से अधिक सवारियां भरी गई थी। ऐसे में साफ है कि निजी बसों के चालकों पर पुलिस कार्रवाई का कोई असर नजर नहीं आ रहा है।

सुबह ढली टनल के पास ओवरलोडिंग पर कार्रवाई को लेकर लोगों में गुस्सा साफ नजर आया। ड्राइवर को जब ये पता चला कि आगे पुलिस खड़ी है तो एचआरटीसी के ड्राइवर ने पहले ही बस रोक दी। इस बस में ज्यादा सवारियां थी। चालक ने सवारियों से नीचे उतरने के लिए कह दिया। खड़े होकर सफर कर रहे लोगों को नीचे उतरना पड़ा। गुस्साए लोगों ने आरोप लगाया कि बिना किसी तैयारियों के ओवरलोडिंग रोकने पर काम शुरू किया गया। लोगों ने कहा कि कई रूटों पर एक ही बसें चल रही हैं। ऐसे में उनके पास इन्हीं बसों में सफर करने के सिवा कोई विकल्प नही है। लोगों ने मांग की कि सरकार पहले रूटों पर बसों की व्यवस्था करें, तभी ऐसे निर्णय सख्ती से लागू करने चाहिए।

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