अश्वनी खड्ड में करवाए चार बोर दस लाख लीटर पानी और मिलेगा
शहर में बढ़ती पानी की किल्लत को दूर करने के लिए ग्रेटर वाटर शिमला सर्कल ने अश्वनी खड्ड से दस लाख लीटर अतिरिक्त पानी शहर तक पहुंचाने की तैयारी की है। इसके लिए अश्वनी खड्ड में चार बोर से पानी उठाया जाएगा और इसे पंप करके शिमला शहर के कसुम्पटी एरिया को पानी दिया जाएगा। इन चार बोर के पानी के सैंपल लेकर प्रशासन आईजीएमसी में टेस्ट करवाए हैं। आईजीएमसी से ये सैंपल पास हो चुके हैं और अब इन सैंपल को पुणे में रिसर्च सेंटर में जांच के लिए भेजा गया है। पुणे से सैंपल पास होने के बाद ही इस पानी को शिमला शहर के लिए सप्लाई करने की तैयारियां की जा रही है। गर्मियों के सीजन में पानी की कमी को देखते हुए प्रशासन इसे एक विकल्प के तौर पर रख रहा है। जबकि भविष्य में इस परियोजना को शुरू करने के लिए भी आईपीएच ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके लिए आईआईटी के विशेषज्ञों को अश्वनी का दौरा करवाया जाएगा। इसके बाद उनकी ओर से जो राय दी जाएगी उसपर गौर करते हुए इसे नए सिरे से शुरू करने की तैयारियां की जाएंगी।
ग्रेटर वाटर सर्कल शिमला के एसई धर्मेंद्र गिल ने बताया कि अश्वनी खड्ड में चार बोर के पानी के सैंपल भरे गए थे और इन्हें आईजीएमसी में टेस्टिंग के लिए भेजा गया था। आईजीएमसी की टैस्ट रिपोर्ट में सैंपल सही पाए गए हैं इसके अलावा अब सैंपल पूणे भेजे गए हैं। यहां से भी सैंपल पास पाए जाते हैं तो यहां से दस लाख लीटर पानी अतिरिक्त शहर तक पहुंचाया जा सकता है।
दो वर्ष पहले अश्वनी खड्ड पेयजल परियोजना को किया गया है बंद शहर को लगभग एक करोड़ लीटर रोजाना पानी की सप्लाई करने वाली अश्वनी खड्ड पेयजल परियोजना को वर्ष 2016 में भयानक पीलिया फैलने के बाद 3 जनवरी को बंद कर दिया गया था। इस परियोजना में मल्याणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी मिलने की वजह से पानी के सैंपल फेल पाए गए थे। जिसके चलते शहर में पीलिया फैला था और 20 लोगों की जान जाने के साथ हजारों की संख्या में लोगों को पीलिया हुआ था।
कैचमेंट एरिया में एक करोड़ लीटर वाले टैंक की होगी रिपयेर
शिमला वाटर कैचमेंट सेंचुरी में ब्रिटिश काल के दौरान बने एक करोड़ लीटर क्षमता वाले पानी के टैंक की रिपेयर निगम प्रशासन करवाने जा रहा है। एक करोड़ लीटर पानी की क्षमता वाले इस पानी के टैंक की रिपेयर करने के बाद इसमें पानी को स्टोर किया जाएगा। इसके बाद शिमला शहर में पानी की कमी के दौरान इसे भी भविष्य में प्रयोग में लाया जा सकता है। हाल ही में कैचमेंट एरिया का दौरा वाटरमैन ऑफ इंडिया राजेंद्र सिंह ने किया था और नगर निगम प्रशासन को इस टैंक को रिपेयर कर प्रयोग में लाने की सलाह दी थी। कैचमेंट एरिया में पानी के साेर्स को पूर्नजीवित करने के लिए भी राजेंद्र सिंह ने सलाह दी है। इस दिशा में भी नगर निगम प्रशासन प्रयास कर रहा है। डिप्टी मेयर राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि पानी के इस पुराने सोर्स केा नए सिरे से सवारने के लिए प्रशासन की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए अधिकारियों को प्लान तैयार करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि कैचमेंट एरिया में पानी के बहुत से स्त्रोत हैं जिन्हें पूर्नजीवित करने के बाद टैप करके शहर तक पानी पहुंचाया जा सकता है।
कैचमेंट एरिया के टैंक में कई स्थानों में दरारें आने की वजह से इससे पानी का रिसाव हो रहा है। इसलिए प्रशासन ने इसे रिपेयर करने का फैसला लिया है। इसके लिए 14 लाख रुपए का एस्टीमेट तैयार किया गया है। इस राशि में टैंक के अंदर आई बड़ी दरारों की रिपेयर की जाएगी। इसके अलावा टैंक तक पहुंचने वाली लाइनों और नालियों की भी रिपेयर की जाएगी। कैचमेंट एरिया में एक करोड़ लीटर पानी की क्षमता वाला यह टैंक शहर का एक मात्र ऐसा ओपन टैंक है।
निगम प्रशासन ने 14 लाख रुपए का एस्टीमेट किया तैयार, हाल ही में वाटरमैन ऑफ इंडिया ने किया था दौरा
कोटी बरांडी के माध्यम से आएगा पानी यदि पूणे से भी बोर के पानी के सैंपल सही पाए जाते हैं इस पानी को शहर तक पहुंचाने के लिए कोटी बरांडी परियोजना के माध्यम से लाया जाएगा। अब कोटी बरांडी परियोजना से 1 से तीन एमएलडी तक पानी शहर के लिए पहुंचाया जा रहा है। जबकि इसकी केपेसिटी अधिक है अत: इसी परियोजना के माध्यम से शहर तक पानी पहुंचाया जा सकता है और इसके लिए कोई अतिरिक्त लाइन भी नहीं बिछानी पड़ेगी।