केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ किए जाएंगे आंदोलन
केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों, जनता पर लगातार हो रहे हमलों और लोकतंत्र को कमजोर करने के विरोध में देशभर में विभिन्न संगठनों ने मिलकर बीते वर्ष 18 सितंबर को जन एकता, जन अधिकार आंदोलन की शुरुआत की। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश में भी राज्य स्तर पर विभिन्न संगठनों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 16 संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में ‘जन एकता-जन अधिकार आंदोलन’ की राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया गया, इसमें तय किया गया कि प्रत्येक संगठन के राज्य अध्यक्ष एवं सचिव इसके सदस्य होंगे। उपस्थित सदस्यों में से डॉ. कुलदीप सिंह तंवर को संयोजक और प्रेम गौतम को सह संयोजक बनाया गया। बैठक में विधायक और किसान सभा के राज्य सचिव राकेश सिंघा शामिल रहे।
बैठक में राष्ट्रीय स्तर पर चिन्हित 26 मुद्दों के अलावा इस अभियान में राज्य से संबंधित मुद्दे भी शामिल किए जाएंगे। इन मुद्दों में मुख्यतः महंगाई, बेरोजगारी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना, मनरेगा में 250 दिन का काम और न्यूनतम दिहाड़ी 500 रुपए करना, भूमि अधिग्रहण में 2015 के संशोधनों को रद्द करके भूमि मालिकों को उचित मुआवजा देना, विस्थापितों का पुनर्स्थापना, सरदार पटेल डैम की ऊंचाई बढ़ाने से पहले विस्थापितों का पुनर्स्थापना, शिक्षा के व्यावसायीकरण, निजीकरण और सांप्रदायिकरण पर रोक, फैलोशिप के कोटे में कट का विरोध समेत कई मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा राज्य स्तर के मुद्दों में भूमि से किसानों की बेदखली पर रोक, जंगली जानवरों से निजात अािद मुद्दे शामिल हैं।
जन एकता-जन अधिकार आंदोलन’ की राज्य स्तरीय कमेटी का गठन