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अाईजीएमसी में तीन साल बाद शुरू हुए टीएमटी टेस्ट, नई मशीन पहुंची

3 वर्ष पहले
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हार्ट पेशेंट के लिए राहत भरी खबर है। हार्ट ब्लॉकेज व सांस फूलने की बीमारी के दौरान होने वाले टीएमटी (ट्रेड मिल टेस्ट) टेस्ट करवाने के लिए उन्हें निजी लैब में जाने की जरूरत नहीं। आखिर तीन साल के लंबे इंतजार के बाद अब आईजीएमसी में टीएमटी मशीन शुरू होगी। प्रशासन ने करीब 20 लाख रुपए की लागत से नई टीएमटी मशीन की खरीद कर दी है। मशीन आईजीएमसी में पहुंच गई है, इस माह के अंत तक मशीन शुरू कर दी जाएगी, उसके बाद यहां पर टीएमटी के टेस्ट हो सकेंगे। वर्ष 2015 में आईजीएमसी में टीएमटी मशीन खराब हो गई थी, उसके बाद अब प्रशासन ने नई मशीन की खरीद की है। तीन साल से यहां पर टीएमटी टेस्ट नहीं हो पा रहे थे।

प्रशासन ने वर्ष 2015 में टीएमटी मशीन लगाने के लिए करीब 15 लाख रुपए खर्च किए थे। इसमें पुरानी मशीन भी कंपनी को दी गई। मगर यह मशीन खराब थी तथा यहां पर चल नहीं पाई। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित कंपनी को यह मशीन ठीक करवाने के लिए कहा। कई बार यहां पर मैकेनिक मशीन ठीक करने भी आए, मगर यह ठीक नहीं हो पाई। उसके बाद कंपनी ने दोबारा मशीन ठीक नहीं करवाई। लिहाजा अब प्रशासन को नई मशीन की खरीद करनी पड़ी।

200 रुपए टेस्ट के बाहर चुकाने पड़ रहे थे 800 रुपए आईजीएमसी में टीएमटी का टेस्ट 200 रुपए में होता था। जबकि यहां पर मशीन खराब होने के बाद निजी क्लीनिक में यह टेस्ट 600 से 800 रुपए तक किया जाता है। टीएमटी करने वाली मशीन निजी लैब भी कम होती है, ऐसे में कई बार टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को बाहर भी जाना पड़ता है, जिससे उन्हें कई गुना अधिक खर्च करना पड़ता है। प्रशासन इस मशीन को लगाने के लिए काफी समय से तैयारी कर रहा था। अब मशीन आईजीएमसी में पहुंच गई है। जल्द ही इसे शुरू कर दिया जाएगा।

क्या है टीएमटी मशीन टीएमटी मशीन (ट्रेड मिल टेस्ट) एक तरह का कॉर्डियोलॉजिस्ट टेस्ट है। टीएमटी मशीन एक तरह का मूविंग बेल्ट है, जिस पर चलते समय सांस फूलने, हार्ट ब्लॉकेज जैसी बीमारी का ईसीजी के जरिए पता लगाया जाता है। टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद ही हार्ट पेशेंट को आगे के इलाज की सलाह दी जाती है। इसमें पता लगता है कि एनजीओ ग्राफी की रोगी को जरूरत है या नहीं। ऐसे में मशीन दोबारा से शुरू होने के बाद मरीजों को राहत मिलेगी।

आईजीएमसी में नई टीएमटी मशीन की खरीद कर ली गई है। जल्द ही इसे शुरू कर दिया जाएगा। आईजीएमसी में रोजाना कई मरीज हार्ट से संबंधित पहुंचते हैं। उन्होंने टीएमटी टेस्ट की जरूरत रहती है। मशीन शुरू होने के बाद उन मरीजों को काफी लाभ मिलेगा। डॉ. अशोक शर्मा, प्रधानाचार्य आईजीएमसी

औसतन सप्ताह में पहुंचते हैं 50 से अधिक मरीज आईजीएमसी में औसतन प्रति सप्ताह हार्ट ब्लॉकेज के 50 से अधिक मामले आते हैं। हार्ट ब्लॉकेज में टीएमटी टेस्ट से ही पता लगता है रोगी की एनजीओ ग्राफी होनी है या नहीं। यहां पर मशीन न होने के कारण मरीजों को टीएमटी टेस्ट करवाने के लिए निजी लैब में जाना पड़ता है, जहां उन्हें तीन से चार गुना अधिक पैसे चुकाने पड़ते हैं। प्रदेश के सभी जिला से हार्ट ब्लॉकेज के मामले आईजीएमसी में आते हैं। इन रोगियों की जांच टीएमटी मशीन में आसानी से की जा सकती है। मौजूदा समय में मशीन खराब होने से मरीजों को बैरंग लौटना पड़ता है।

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