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केंद्र सरकार का हिमाचल को झटका, स्वच्छ भारत मिशन के बजट में 7 करोड़ की कटौती
केंद्र सरकार ने हिमाचल को बड़ा झटका दिया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में प्रदेश के लिए 41.96 करोड़ा का बजट मंजूर किया था। यह बजट वर्ष 2019 तक के लिए मंजूर किया गया था। केंद्र सरकार ने एकाएक इस बजट एलोकेशन को इस वर्ष घटा कर 34.96 करोड़ रुपए कर दिया है। बजट एलोकेशन कम होने से प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य को हासिल करना अब शहरी विकास विभाग के लिए चुनौती बन गया है। इस मिशन के तहत केंद्र सरकार चार अलग अलग मदों के लिए बजट ऐलोकेट करता है। इसमें निजी और सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के लिए, सोलेड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए, प्रचार प्रसार के लिए और प्रशिक्षण शिविर और कार्यशालाओं के आयोजन के लिए बजट जारी किया जाता है। इन सब मदों के लिए बजट अलग अलग तय किया गया है। निजी शौचालय निर्माण के लिए तो केंद्र सरकार ने बजट को छह हजार से बढ़ा कर 12 हजार किया है लेकिन इसका बजट आबंटन 6.03 करोड़ रुपए से घटा कर 5.02 करोड़ रुपए किया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर प्रदेश में 12560 शौचालयों का निर्माण किया जाना है। इनमें से 5000 शौचालयों के निर्माण किए जाने की एप्लीकेशन विभाग को प्राप्त हो चुकी है।
सोलेड वेस्ट मैनेजमेंट के बजट में तीन करोड़ की कटौती
केंद्र सरकार ने सोलेड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत दिए जाने वाले बजट में तीन करोड़ रुपए की कटौती की है। इस प्रोजेक्ट के लिए पहले 18.26 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था जो इस वर्ष घटा कर 15.22 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसमें शहरों से कूड़ा कचरा प्रबंधन के लिए डोर टू डोर गार्बेज कलेक्शन, सोलेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करना कई कार्य शामिल है। प्रचार प्रसार के बजट कोई कटौती नहीं की गई है यह पहले की तरह 10 करोड़ रुपए ही तय की गई है। कैपेसिटी बिल्डिंग के बजट एलोकेशन को 3.32 करोड़ रुपए से घटा कर 2.79 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसके तहत कर्मचारियों को प्रशिक्षण उनके लिए कार्यशालाओं का आयोजन, प्रशासनिक खर्चों को चलाना आदि कई कार्य इस बजट से किए जाते है।
योजना के तहत चार मदों के बजट में की कटौती
बजट 1 करोड़ से घटा कर किया 90 लाख
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के लिए वर्ष 2015 में एक करोड़ आठ लाख रुपए के बजट का प्रावधान किया था। इस वर्ष यह बजट घटा कर 90 लाख रुपए कर दिया गया है। प्रदेश में वर्ष 2019 तक 800 नए सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।