पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • एक रात में गुम हो गई क्षैणी गांव में संजोकर रखी सदियों की विरासत

एक रात में गुम हो गई क्षैणी गांव में संजोकर रखी सदियों की विरासत

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हर घर गांव कस्बा और शहर अपने साथ सदियों के अतीत की यादों आने वाली नस्लों के सामने रखता जाता है। क्षैणी गांव में भी सदियों की विरासत छुपी थी। लेकिन एक रात में ही इस गांव ने अपनी पुशतैनी विरासत की वह पहचान खो दी है जहां एक दो नहीं बल्कि करीब डेढ़ हजार लोगों का भरा पूरा खुशहाल गांव बसा था। नावर क्षेत्र के सबसे बड़ा गांव कहा जाने वाला क्षैणी के आधे से ज्यादा जल चुके घरों के परिवार के लोगों के पास हताशा और बेबसी के सिवा कुछ नहीं बचा है।

क्षैणी गांव में आग के कहर का सामना करने वाले 54 परिवारों के करीब तीन सौ लोग चंद घंटों के अंदर बेघर हो गए। कल तक अपने आशियानों में सुखमय जीवन बिता प्रभावित परिवारों के पास अाज बदन पर पहने कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं बचा है। इस भीष्ण अगिनकांड में अधिकांश लोग अपने जीवन भर की जमा पूंजी गांव चुके हैं। अपने आशियानों को खो चुके इन लोगों के लिए अपने आशियानों को बनाना बड़ी चुनौती बन गया है।

बूढ़ी आंखों में हैं हर वो मंजर

जिन लोगों ने बचपन से लेकर बुढ़ापे तक इस गांव को फलते फूलते देखा, उन आंखों में अब सिर्फ खालीपन था। आग के भीष्ण तांडव के बाद प्रभावित परिवारों की हालत देख कर गांव में पहुंचने वाले हर व्यक्ति का दिल पसीज रहा है। जीवन भर अपने आशियानों को बनाने व सजाने में लगे रहे बजुर्ग बेघर होने के बाद खुले आसमान तले बेसुध से बैठे हैं। गांव के मासूम बच्चे सामान के ढेर में से अपने खिलौने ढूंढ रहे हैं तो महिलाओं की आखों से आंसू रूकने के नाम नहीं ले रहे हैं। प्रभावित परिवारों की हालत देख कर हर किसी का दिल पसीज रहा है।

सरकारी मदद तो कुछ भी नहीं

रिलीफ मैन्युअल के अनुसार ऐसे हादसों में उजड़ चुके परिवारों को फौरी राहत के रूप में दस से पच्चीस हजार रुपए तक की फौरी राहत प्रदान करता है। आग में सब कुछ खो चुके परिवार के लिए सरकार की यह मदद ऊंट के मुंह में जीरा साबित होती है। जबकि ऐसे हालत में प्रभावित परिवारों के लिए मकानों का बीमा योजना कारगर साबित हो सकती है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने घटना पर दुख व्यक्त किया है।

क्षैणी में प्रभावित लोग जो अाग से बचा पाए दिनभर उसे संभालने में लगे रहे।

लकड़ी के मकानों को जला रही है आग

अप्पर शिमला के पहाड़ी क्षेत्र में बने काष्ठ कला के अद्वितय नमूनों के लिए आग खतरनाक साबित हो रही है। अकेले रोहड़ू उपमंडल में ही दर्जन भर गांव आग की भेंट चढ़ चुके हैं। नावर क्षेत्र का गंगा नगर, करछारी, टिक्कर और अब क्षैणी आग के दाग झेल चुके हैं। छौहरा में बचाडी, रोहल व तांगणू और जुब्बल में खडापत्थर, मांदल सहित कई गांव भी आग की तबाही देख चुके हैं।

महासू देवता की पालकी भी जली | क्षैणी गांव में मंदिर के जीर्णोद्धार के चलते ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले ही देवता महासू पालकी सहित सभी प्राचीन बेशकीमती सामान गांव के पुश्तैनी घर में रखा था। बुधवार सुबह फैली आग में पुश्तैनी मकान सहित देवता के बेशकीमती सामान व पालकी भी आग की भेंट चढ़ गई है।

बीते साल इन्हीं दिनों देवता के स्वागत को सजाए गए थे घर

जोगेंद्र शर्मा | शिमला

कुदरत का संयाेग देखिए...पिछले साल इन्हीं दिनों क्षैणी गांव के लोग अपने घरों को सजाने संवारने में लगे हुए थे...कुछ ने नए मकान बनाए थे तो कुछ ने मकानों को रंग सफेदी करके संवारा था...ये घर कुल देवता नारायण के तीन धाम की यात्रा से वापस लौटने के लिए होने वाले समारोह के लिए तैयार हुए थे। घराें को सजाने के लिए लाखों रुपए खर्च किए लेकिन अब वही घर राख में बदल गए। पिछले साल 31 मार्च 2017 को देवता नारायण चार धाम की यात्रा पर निकले। 41 लोगों के साथ देवता नारायण चार धाम की यात्रा से 25 मई को वापस गांव पहुंचेे। देवता के आने से पहले ही गांव वालों ने अपने पुश्तैनी घर मरम्मत के बाद तैयार कर दिए थे।

भास्कर से बात करते हुए टिक्कर पंचायत के प्रधान प्रवीण आजाद ने कहा कि पिछले साल अप्रैल माह में पूरा गांव देवता नारायण के गांव आगमन की तैयारियों मेें लगा हुआ था। कोई घर को सजा रहा था तो कोई अपने घर को नई लुक दे रहा था। अब लोग उस दौर को याद करके रो रहे हैं। कई लोगों के पुश्तैनी मकान भी थे, इसकी मरम्मत करने में भी काफी पैसे खर्च किए हैं। 15 परिवार बीपीएल हैं। इनके भी मकान इस आगजनी में जल गए हैं।

देवता नारायण पिछले साल 25 मई को पहुंचे थे गांव

अब तक के भीषण अग्नि हादसे

कुल्लु के मलाणा गांव 5 जनवरी 2008 को भयंकर आग लगी इसमें 158 घर जले,900 परिवार बेघर हो गए थे।

बंजार कोटला मे 2014-15 में 50 घर जल गए थे और 80 परिवार बेघर हो गए थे।

दीपक प्रोजेक्ट में नंवबर 2014 भयंकर आग लगी थी जिससे दीपक प्रोजेक्ट कार्यालय जल गया था।

एजी ऑफिस में 2015 में भयंकर अाग से ऊपरी तीसरी मंजिल जल गई थी इसमें लोगों का रिकार्ड जल गया था।

राेहड़ु के तांगणु गांव में सन 2016 में आग लगने से लगभग 35 मकान जले ,40 परिवार बेघर हो गए थे।

चौपाल के सरांहा में फरवरी 2018 में लगभग 20 मकान जल गए थे ,परिवार 25 परिवार बेघर हो गए थे।

लक्कड़बाजार में फरवरी 2018 में छह दुकानें जल गई थी,

खबरें और भी हैं...