प्रदेश की नई ऊर्जा पाॅलिसी पर सरकारी विभाग एकमत नहीं
विधि विभाग की मंजूरी के बगैर ही कैबिनेट में मंजूरी को भेजी फाइल
शिमला|हिमाचल सरकार की नई ऊर्जा पालिसी विभागीय मंजूरी न मिलने के कारण कैबिनेट तक ही नहीं पहुंच पा रही है। 20 दिनों से लगातार ही इस पालिसी को कैबिनेट में लाने का प्रयास किया जा रहा है, इस दौरान सरकार की तीन कैबिनेट की बैठकें हो चुकी है। 15 अप्रैल को कैबिनेट की बैठक से पहले इसे मंजूरी के लिए लाने की पूरी तैयारी थी। विभाग की आेर से इसका प्रस्ताव बिना वित्त विभाग आैर विधि विभाग की मंजूरी के बगैर भेज दिया था। इसे वापस फिर से संबंधित विभाग को भेज दिया, हालांकि वित्त विभाग की आेर से तो समय रहते ही कमेंट दे दिए थे, लेकिन नीतिगत बदलाव के कारण सरकार इसमें सभी विभागों की मंजूरी आैर सुझाव के बाद ही लागू करना चाहती है। राज्य सरकार के लिए सबसे बड़़ी चुनौती है कि पिछले पांच सालों में हिमाचल में बिजली के क्षेत्र में निवेशक नहीं मिल रहे हैं। निवेशकों को बिजली के राष्ट्रीय स्तर की मार्केट में अच्छे दाम न मिलने के कारण अब यह घाटे का सौदा लगने लगा है, इसलिए राज्य में बिजली क्षेत्र में निवेश के लिए भी निवेशक रियायतों की मांग करने लगे हैं, हालांकि राज्य में दस साल पहले तक बिजली के प्रोजेक्ट पर प्रति मेगावाट अपफ्रंट मनी के साथ फ्री रायल्टी लेकर दिए जाते थे।
निवेशक इन मसलों में चाहते हैं राहत| राज्य में बिजली क्षेत्र में निवेश के लिए निवेशक लीज मनी की राशि को कम करने, रायल्टी आैर फ्री बिजली के कांसेप्ट को खत्म करना चाहते हैं। अभी राज्य में बिजली प्रोजेक्ट लगाने वाली कंपनी को अपफ्रंट मनी के साथ पहले 12 साल तक 12 फीसदी बिजली फ्री रायल्टी के रूप में आैर लीज मनी का अलग से भुगतान करना होता है। ज्यादा उत्पादन लागत आैर कम कमाई के कारण बिजली संचालक कंपनियों ने बीस से ज्यादा आवंटित प्रोजेक्टों को भी वापस करने का आवेदन किया है। इन सभी कंपनियों ने सरकार को दी गई अपफ्रंट मनी वापस मांगी है।