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प्रदेश में ड्रोन से पकड़ेंगे अवैध निर्माण, खनन आैर कटान : जयराम ठाकुर

3 वर्ष पहले
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हिमाचल में अवैध निर्माण, खनन आैर कटान को रोकने के लिए सरकार ड्रोन की मदद लेगी। सीएम जयराम ठाकुर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर हुए सेमिनार में प्रस्तुति देखने के बाद कहा कि राज्य में बेहतर शासन के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक के तहत ड्रोन को चला कर इमेज किसी भी क्षेत्र की तैयार की जाती है, अगले सप्ताह या महीने दोबारा से इसी क्षेत्र की इमैज तैयार करें। इसमें जहां बदलाव दिखे, वहां पर अधिकारियों की टीम जाकर वैध या अवैध निर्माण की कंफर्मेशन कर सकते हैं। सीएम ने कहा कि राज्य में बेहतर प्रशासन देना सरकार का लक्ष्य है, इसके लिए नई तकनीक का जहां भी संभव होगा, वहां इस्तेमाल करने से गुरेज नहीं करेगी। विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद ने मंगलवार को शिमला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ ‘पोटेन्शियल एप्लीकेशन पर सेमिनार का आयोजन किया। इस अवसर पर सीएम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की स्टडी दशकों से हो रही है। अभी तक यह कंप्यूटर विज्ञान में सर्वाधिक भ्रामक विषय है। सीएम ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट के तहत राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से अवैध निर्माण, खनन आैर कटान को रोकने पर काम होगा। अवैध खनन को भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अधिकतम उपयोग से रोका जा सकता है। रोजगार के भी नए अवसर मिलेंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण आैर हिमकोस्ट के अध्यक्ष तरुण कपूर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आगामी कुछ वर्षों में रोज़गार के अवसर सृजित करेगा। प्रदेश को अपनी शिक्षित युवा आबादी के कारण इस क्षेत्र में मुख्य भूमिका अदा करनी है। अतिरिक्त मुख्य सचिव बीके अग्रवाल, अनिल खाची, प्रधान सचिव आरडी धीमान, प्रबोध सक्सेना आैर ओंकार शर्मा सचिव अरुण शर्मा सहित अन्य ने हिस्सा लिया।

हिमाचल प्रदेश में वन संपदा बचाने में मिलेगी मदद

इस सेमिनार में अधिकारियों के सवालों के जवाब में विशेषज्ञों ने साफ कहा कि किसी भी स्थान पर अवैध निर्माण का पता लगाने में यह सहायक साबित होगा। वनों को बचाने के लिए इसकी इमेज बनाई जा सकती है। इसमें पेड़ों की संख्या या नंबरिंग भी हो सकती है। इसी तरह नदियों के किनारे अवैध खनन पर नजर रखी जा सकती है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कार्यक्रम में बोले सीएम, ट्रायल के तौर पर करेंगे प्रयोग

हर परियोजना की जियो टैग से करें निगरानी

कंपयूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग आईआईटी मद्रास के अध्यक्ष आैर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के अध्यक्ष वी कामाकोटी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आगामी कुछ वर्षों में आर्थिक बदलाव लाने के लिए तैयार है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए डिजीटल इंडिया एक बड़ा अवसर प्रदान कर रहा है। सरकार की हर परियोजना को जियो-टैग कर इसकी समीक्षा व निगरानी की जा सकती है। यह सरकारी परियोजनाओं में भागीदारी की भावना उत्पन्न करती है। अगले पांच वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सदुपयोग से सलाहकार समाधान, स्वास्थ्य देखभाल, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं, बीपीओ सहित क्षेत्र नौकरियों के मुख्य केंद्र के रूप में उभर सकते हैं।

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