कसौली गोलीकांड की जांच रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि पुलिस महकमे ने इस मामले में पूरी तरह से कोताही बरती। डिविजनल कमिश्नर की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि मौके पर 14 पुलिस कर्मी मौजूद थे। इसमें दो क्यूआरटी (क्विक रिएक्शन टीम) के जवान एके 47 से लैस थे। इसके बावजूद आरोपी पर एक भी गोली नहीं चलाई गई।
गोली मारने के बाद आरोपी विजय कुमार मौके से भागा तो उसे पकड़ने के लिए सबसे पहले धर्मपुर थाने के एसएचआे उसकी आेर दौड़े, वह भी बिना किसी हथियार के पीछा करते रहे। जांच में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि पिस्टल धारक आरोपी का पीछा करते हुए पुलिस अधिकारी बिना हथियार के ज्यादा नजदीक नहीं जा पाए। इस कारण आरोपी को टीसीपी की महिला अधिकारी सहित पीडब्लयूडी के कर्मचारी को शूट कर मौके से भागने का मौका मिला। इस मामले की जांच राज्य सरकार को सौंप दी है। अब सीएम की आेर से कार्रवाई पर सभी की नजरें हैं। डीसी शिमला ने 133 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इसमें मौके पर मौजूद सभी प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ की है। रिपोर्ट में 18 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।
एक मई को हुआ था गोलीकांड : कसौली का गोलीकांड एक मई को हुआ था। इस दिन टीसीपी की अधिकारी शैलबाला सुप्रीमकोर्ट के आदेशों के बाद कसौली में होटलों से अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए टीम के साथ पहुंची। वहां पर व्यवसायी आैर बिजली बोर्ड के कर्मचारी रहे विजय सिंह ने उन पर गोली चला दी। इसमें उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। वहीं पीडब्लयूडी के कर्मचारी की काफी दिन बाद पीजीआई में मृत्यु हुई।
छोटी-छोटी गलतियां पड़ गईं भारी
पहली गलती: रिपोर्ट के मुताबिक जब आरोपी ने आत्महत्या की धमकी दी थी तो उसे हिरासत में लेने की देरी पुलिस ने की। अगर उसे पकड़ लेते तो न वह शैलबाला से बहस कर पाता और न ही उनपर फायर।
प्रशासनिक गलती: कार्रवाई करने से जाने से पहले ही लाइसेंस धारकों के हथियार कब्जे में लेने या प्रशासन के पास जमा करवाने की प्रक्रिया को अमल में लाया जाना चाहिए। इसकी भी अनदेखी की गई।
...तो कसौली से बाहर नहीं जा पाता आरोपी
रिपोर्ट में साफ है कि स्पॉट से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए पुलिस ने कुछ सड़कों पर नाके तत्काल लगा दिए थे, लेकिन गांव की पगडंडियों पर पुलिस की नजर नहीं थी। इसका फायदा उठाते हुए आरोपी ने रात में अपने गेस्ट हाउस के पास पिस्टल छुपाई आैर मुख्य सड़क मार्ग तक पहुंचा। इन छोटे रास्तों पर पुलिस स्थानीय लोगों की मदद से नजर रख सकती थी।
भास्कर न्यूज | शिमला
कसौली गोलीकांड की जांच रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि पुलिस महकमे ने इस मामले में पूरी तरह से कोताही बरती। डिविजनल कमिश्नर की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि मौके पर 14 पुलिस कर्मी मौजूद थे। इसमें दो क्यूआरटी (क्विक रिएक्शन टीम) के जवान एके 47 से लैस थे। इसके बावजूद आरोपी पर एक भी गोली नहीं चलाई गई।
गोली मारने के बाद आरोपी विजय कुमार मौके से भागा तो उसे पकड़ने के लिए सबसे पहले धर्मपुर थाने के एसएचआे उसकी आेर दौड़े, वह भी बिना किसी हथियार के पीछा करते रहे। जांच में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि पिस्टल धारक आरोपी का पीछा करते हुए पुलिस अधिकारी बिना हथियार के ज्यादा नजदीक नहीं जा पाए। इस कारण आरोपी को टीसीपी की महिला अधिकारी सहित पीडब्लयूडी के कर्मचारी को शूट कर मौके से भागने का मौका मिला। इस मामले की जांच राज्य सरकार को सौंप दी है। अब सीएम की आेर से कार्रवाई पर सभी की नजरें हैं। डीसी शिमला ने 133 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इसमें मौके पर मौजूद सभी प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ की है। रिपोर्ट में 18 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।
एक मई को हुआ था गोलीकांड : कसौली का गोलीकांड एक मई को हुआ था। इस दिन टीसीपी की अधिकारी शैलबाला सुप्रीमकोर्ट के आदेशों के बाद कसौली में होटलों से अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए टीम के साथ पहुंची। वहां पर व्यवसायी आैर बिजली बोर्ड के कर्मचारी रहे विजय सिंह ने उन पर गोली चला दी। इसमें उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। वहीं पीडब्लयूडी के कर्मचारी की काफी दिन बाद पीजीआई में मृत्यु हुई।