शहर के भीतर चलने वाली टैक्सियों में शीघ्र मीटर लगाए जाएंगे। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मीटर लगाने के लिए एक हफ्ते में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। परिवहन निदेशक ने कोर्ट को शपथपत्र के माध्यम से बताया कि टैक्सियों में मीटर लगाने को जरूरी बनाने के हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में दायर याचिका खारिज हो गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने अपने आदेशों में कहा कि अब कम से कम शिमला शहर में चलने वाली टैक्सियों में मीटर लगाने को लेकर कोई अड़चन नहीं रह गई है। सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वस्त किया गया कि शहर में चलने वाली टैक्सियों में मीटर लगाने की प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर शुरू कर दी जाएगी। कोर्ट ने परिवहन निदेशक को अगली सुनवाई के दौरान टैक्सियों में मीटर लगाए जाने से जुड़े तमाम रिकॉर्ड सहित उपस्थित रहने के आदेश दिए। प्रेमराज व अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के बाद जिलाधीश शिमला से पूछा था कि शिमला शहर में कितनी गाड़ियां पंजीकृत की गई है और क्या प्रत्येक गाड़ी मालिक ने अपनी पार्किंग के बाबत हाईकोर्ट के आदेशानुसार आरटीओ के समक्ष उल्लेख किया है या नहीं। अगर नहीं किया है तो इन लोगों के खिलाफ इनके रजिस्ट्रेशन नंबर को रद्द करने बाबत क्यों एक्शन नहीं लिया गया है।
कोर्ट ने इसके अलावा जिलाधीश शिमला व पुलिस अधीक्षक शिमला को शपथ पत्र के माध्यम से यह भी बताने को कहा था कि पंजीकृत की गई गाड़ियों में कितनी टैक्सियां हैं जो शिमला शहर में चलाई जा रही है। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या इन टैक्सी मालिकों ने अपनी टैक्सी पर उपभोक्ता से वसूले जाने वाले किराए के मीटर लगा रखे हैं या नहीं। उन्होंने टैक्सी में किराए बाबत साइन बोर्ड के साथ किराए की दरें दर्शा रखी है या नहीं। सरकार की ओर से बताया गया था कि मामला सुप्रीमकोर्ट में पहुंचने के बाद टैक्सियों में मीटर लगाने की प्रक्रिया को रोक दिया गया था। अब सुप्रीमकोर्ट से एसएलपी खारिज होने के बाद टैक्सियों में मीटर लगाने जरूरी होंगे। मामले पर सुनवाई 24 मई को होगी।