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काटे गए पेड़ों के बदले भूपराम को देने होंगे ३४ लाख रुपए

3 वर्ष पहले
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हाईकोर्ट ने सब तहसील जुन्गा में वन विभाग की कोटी रेंज में 416 पेड़ों के कटान के मामले में भूपराम पर शिकंजा कसते हुए उसे दो सप्ताह के भीतर 34 लाख 68 हजार 233 रुपए जमा करने के आदेश दिए है। यह रकम उन पेड़ों की कीमत के रूप में आंकी गई है, जिन्हें कथित तौर पर भूप सिंह ने अवैध खनन हेतू पेड़ काटे थे। भूपराम को यह राशि हाईकोर्ट रजिस्ट्री में जमा करवानी होगी। कोर्ट ने सरकार को यह छूट भी दी है कि वह भूपराम को मिली जमानत को रद्द करने हेतु सक्षम कोर्ट के समक्ष आवेदन कर सकती है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए भी दिए हैं कि वह इस अवैध कटान के संदर्भ में संबंधित दोषी वन व अन्य कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे। उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी 2018 को कोटी रेंज में बड़े पैमाने पर वन कटान का मामला सामने आया था। यह मामला तब उजागर हुआ जब उक्त बीट का फारेस्ट गार्ड रिटायर हुआ और नए गार्ड पवन ने बीट संभाली। गार्ड की शिकायत के पश्चात वन विभाग की टीम ने शलोट गांव के साथ लगते यू- 260 जंगल में 400 से अधिक पेड़ों के कटे ठूंठ पाए।

फॉरेस्ट एक्ट के तहत दर्ज हुआ है केसः इस मामले में रेंज ऑफिसर अनु ठाकुर की शिकायत पर पुलिस ने जुन्गा के शलोट गांव के भूप सिंह के खिलाफ फॉरेस्ट एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की गई है। जांच में सामने आया था कि वन विभाग के यू-260 जंगल में पेड़ों का कटान पिछले 4 सालों से गुपचुप तरीके से हो रहा था, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। कोर्ट ने प्रधान सचिव वन को यह बताने के आदेश भी दिए कि इस मामले में लिप्त दोषी वन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्यवाई अमल में लाई गई है। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या केवल भूपराम ही इस वन कटान के अपराध में शामिल है या अन्य लोग भी निजी अथवा सरकारी भूमि पर अवैध पेड़ कटान में शामिल है। उल्लेखनीय है कि मामला दर्ज करने के बाद वन विभाग और पुलिस टीम ने भूपराम के घर पर दबिश दी थी और उसके घर से 23 बोरियां कोयले की बरामद की। मामले पर सुनवाई 31 मई को होगी।

देवदार के अलावा चीड़ के भी पेड़ थे इनमें देवदार, बान के अलावा चीड़ के पेड़ भी शामिल थे। इनकी मार्केट वेल्यू करीब 20 से 30 लाख के करीब बताई गई थी। अवैध पेड़ कटान का मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने भूप सिंह के खिलाफ पुलिस थाना ढली मेंं एफआईआर भी दर्ज करवाई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के पश्चात् कहा कि इतने बड़े पैमाने पर वन कटान के लिए केवल सेवानिवृत्त फारेस्ट गार्ड हरी सिंह, डिप्टी रेंजर विक्की चौहान व प्रकाश चंद ही को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। बल्कि इसमें अन्य वन कर्मी भी संलिप्त होंगे। इन तीन वन कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाई अमल में लाई गई है।

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