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पीएचसी का दर्जा तो बढ़ाया, मगर सुविधा नहीं मिली, एक बेड पर दो-दो मरीज एडमिट, कई बार फर्श पर सुलाए जाते

3 वर्ष पहले
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सरकार पीएचसी का दर्जा तो बढ़ा देती है, मगर वहां पर मूलभूत सुविधाएं देना भूल जाती है । ऐसा हाल है सिरमौर के दुर्गम क्षेत्र नौहराधार का है। यहां पर सरकार ने पीएचसी से सीएचसी का दर्जा तो जरूर बढ़ाया, मगर सुविधा न के बराबर है।

यहां पर मरीज जब इलाज करने आते हैं, तो उन्हें बैठने की कोई सुविधा नहीं मिलती है। मरीजों को खड़े ही रहना पड़ता है। इस अस्पताल में मात्र तीन कमरे हैं। इन्हीं कमरों में मरीजों का भी इलाज चल रहा है और साथ ही प्रसूति कक्ष भी है। साथ में एक जगह डाॅक्टर भी बैठते हैं, मगर सरकार इस मामले में बेखबर है। यह अस्पताल 23 पंचायतों का केंद्र बिंदू है। यहां पर 23 पंचायतों के आलावा जिला शिमला के लवानधार, मझोली के लोग भी अपनी इलाज करवाने के लिए आते हैं। इस सामुदायिक भवन में हर रोज 80 से 100 दिन की ओपीडी होती है। जब टीकाकरण होता है तब लोग यहां पर बहुत दिक्कत होती है। इस अस्पताल में जब रात के समय मरीज आ जाए, तो डाॅक्टरों को दाखिल करने में दिक्कतें आती हैं। यदि दाखिल कर भी लें तो एक बेड पर दो-दो मरीज लेटाने पड़ते हैं या फिर नीचे फर्श पे लेटाना पड़ता है। क्योंकि यहां पर कमरों की असुविधा है मात्र पूरे अस्पताल में तीन ही कमरे हैं। हैरानी की बात है कि 23 सितंबर 2016 को पूर्व मुख्यमंत्री ने सीएचसी भवन का विधिवत शिलान्यास किया था, मगर आज तक अढाई वर्ष बीत जाने पर यहां पर भवन में ईंट तक नहीं लगा है। अभी तक टेंडर तक नहीं लगा। मौजूदा समय में यहां पर तीन चिकित्सक, एक डेंटिस्ट, दो स्टाफ नर्से, एक फार्मासिस्ट, एक क्लर्क लैब टेक्नीशियन, एक टेलीमेडिसन, एक चतुर्थ कर्मचारी यानि 14 लोगों का स्टाफ है, जबकि यहां पर 5 खाली पद हैं।

सरकार ने सीएचसी का दर्जा पीएचसी तो किया लेकिन यहां दािखल होने वाले मरीजों को मूलभूत सुविधाएं देना भ्ूल गई

भूमि ट्रांसफर हो चुकी

अस्पताल में डाॅक्टर असीम कोशिक ने बताया कि भूमि ट्रांसफर हो चुकी है। भवन के दस्तावेज भी लोक निर्माण विभाग को दे दिए हैं। पैसा भी लोक निर्माण विभाग को दे दिया गया है। अस्पताल में भवन की कमी के चलते इलाज करने में दिक्कतें आ रही हंै। हम लोग मरीज को एडमिट भी नहीं कर सकते हैं। काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग संगडाह के एल चौधरी ने बताया कि एनडीएस हो चुकी है। टीएस बाकी है। दो महीने के अंदर टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

तीन कमरों मेंं चल रहा पीएसची भवन

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