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ग्रीष्मकालीन अभिरूचि शिविर में दिया योग का प्रशिक्षण

3 वर्ष पहले
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बाड़मेर | सूर्योदय से पूर्व चार से छह बजे तक नियमित योगाभ्यास किया जाए तो बालक का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, आध्यात्मिक, चारित्रिक, नैतिक गुणों का विकास होगा। यह बात पतंजलि योग समिति के वरिष्ठ योग शिक्षक हनुमान राम डऊकिया ने गणेश विद्या मंदिर उमावि में ग्रीष्मकालीन अभिरुचि शिविर के विशेष योग सत्र के दौरान कही। इसका मीडिया पार्टनर दैनिक भास्कर है। योगाभ्यास के दौरान डऊकिया ने मंडूकासन, शशांकासन , गोमुखासन, उष्ट्रासन, चंद्रासन, मयुरासन, शीर्षासन प्राणायाम में कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी,ओमकार की ध्वनि करवा कर उनका महत्व बताया गया। प्रातःकालीन सत्र में समाजसेवी रणवीर सिंह भादू ने सभी को मनुष्य में निहित शक्तियों के बारे में बताया और संस्कार के साथ मोटिवेट किया। इस दौरान बताया कि माता-पिता, गुरुजनों और बड़ो के आशीर्वाद से, विनम्रता से, ईमानदारी, मेहनत, बेहतर शिक्षा, अभ्यास आदि से साधारण मनुष्य असाधारण बन जाता है और फिर मिसाल का रूप लेकर कोई वैज्ञानिक, डॉक्टर, समाजसेवी, अधिकारी, श्रेष्ठ प्रशासक जैसा बनता है। यह सब तभी संभव है जब आप अपने को कमजोर नहीं मानकर अपनी अंदर की शक्तियों को पहचानों और संस्कार के साथ उपयोग में लाओ।निदेशक आनंद जे थोरी ने बताया कि आज के समय मे गिरते जा रहे धैर्य, सामाजिक मूल्यों, संस्कारों आदि को बनाए रखने के लिए संस्कार के साथ योग का संगम महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर शिविर प्रभारी प्रिया पारवानी, खम्मा चौधरी, हेमा कृपलानी, लता पारवानी, लिखमाराम चौधरी, संतोष सिसोदिया, रवि जोड़, दिव्या आदि प्रशिक्षक उपस्थित रहे।

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