इस सृष्टि में हम जो आंखों से देखते हैं, कानों से सुनते हैं, समस्त इन्द्रियों से जो कुछ भी अनुभव करते हैं, वे सभी यह प्रमाणित करते हैं कि जगत में बहुत विभिन्नताएं हैं। जैसे हम देखते हैं कि अधिकतर वनस्पतियां, पेड़ पौधे हरे रंग के हैं किंतु उस हरे रंग में भी बहुत विभिन्नताएं हैं। नीम के पेड़ की हरीतिमा बबूल के पेड़ से भिन्न है तो तुलसी, पीपल, लताएं आदि की हरीतिमा भी अन्यों से भिन्न है। ये सभी विभिन्नताएं हमने नहीं, सृष्टि के सृजनहार ने बनाई है। मानव में भी इसी प्रकार अनेकों विभिन्नताएं हैं, जैसे- स्त्री और पुरुष, कद काठी, रंग रूप, स्वभाव आदि। अनेक लोग समानता की बात करते हैं किंतु व्यवहार की समानता तो संभव है, क्षमताओं की नहीं। लोग कहते हैं सभी मनुष्यों का रक्त लाल है, पर वे यह भूल जाते हैं कि रक्त तो पशुओं का भी लाल होता है। सत्य तो यह है कि विभिन्नता से ही संसार में सौंदर्य है। संसार में सभी संसाधन उपलब्ध है पर उनका संग्रहण सभी के पास एक सा नहीं है, हो भी नहीं सकता। इस शिविर में भी हम एक सी गणवेश, एक से आचरण तथा एक नेतृत्व के आदेशों की पालना करके विभिन्नताओं में एकता का निर्माण कर रहे हैं। यहां जो व्यवस्था दी गई है, उसका पालन करें। स्वयं से पहले अन्यों का ध्यान रखें, यही श्रेष्ठता है। हमारा स्वधर्म क्षात्रधर्म है जिसका आरंभ और अन्त त्याग ही है। उच्च प्रशिक्षण शिविर के 9वें दिन संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर ने अपने प्रभात संदेश में यह बात कही। शिविर में “मेरी साधना” पुस्तक पर चर्चा के दौरान कृपणता और कायरता को त्यागकर उदारता और वीरता को अपनाने की बात कही गई। अर्थबोध के दौरान तनसिंह द्वारा रचित सहगीत ‘कहो चुकाई कीमत किसने’ पर चर्चा करते हुए भारत के उज्ज्वल इतिहास में क्षत्रियों के योगदान को स्मरण किया गया।
क्षत्रिय युवक संघ की ओर से उच्च प्रशिक्षण शिविर को संघ प्रमुख भगवानसिंह राेलसाहबसर ने किया संबोधित
बौद्धिक में ‘हमारा ऐतिहासिक अन्तरावलोकन’ विषय पर प्रवचन हुआ
तनसिंह की विचार धारा को घर-घर तक पहुंचाने के लिए शाखा व शिविरों के माध्यम से स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। बाड़मेर के उच्च प्रशिक्षण शिविर में 600 स्वयंसेवकों को तन सिंह की अवधारणा सामूहिक संस्कार मय कर्म प्रणाली के तहत मनोवैज्ञानिक पद्घति से प्रातः 5 बजे जागरण से रात्रि 10 बजे शयन तक खेल, बौद्धिक चर्चा, इतिहास के ज्ञान अवज्ञात, योग, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।