अच्छे वातावरण और माता-पिता से मिलते हैं संस्कार: रोलसाहबसर
बाड़मेर. शिविर में प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देते हुए।
बाड़मेर | इंसान की पहचान उसके संस्कारों से बनती है। मानव का जन्म पूर्व जन्म के संस्कारों के साथ होता है तत्पश्चात हम संस्कार की बातें सबसे पहले अपने परिवार से सीखते हैं। संस्कार शिक्षा से नहीं अपितु माता पिता परिवार और अच्छे वातावरण के अनुरूप मिलते हैं। क्षत्रिय युवक संघ पिछले 60 वर्षों से समाज में संस्कार निर्माण का कार्य कर रहा है। एक क्षत्रिय का सुसंस्कृत होना अनिवार्य है। इंसानियत की शिक्षा केवल सामाजिक संस्कार शिविरों के माध्यम से ही मिलती है। संघ सिखाता है कि व्यक्ति को परिवार के लिए स्वयं के सुखों, गांव देश के विकास में, स्वार्थों का त्याग करना चाहिए। क्षत्रिय युवक संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर ने बाड़मेर में चल रहे उच्च प्रशिक्षण शिविर के पांचवें दिन शिविरार्थियों को प्रभात-संदेश में यह बात कही।
उच्च प्रशिक्षण शिविर में मंगलवार को श्रीमदभागवत गीता के श्लोकों का शुद्धता के साथ उच्चारण करने को लेकर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान आयुवान सिंह की पुस्तक “मेरी साधना” के अवतरणों पर चर्चा की गई। बौद्धिक सत्र चर्चा में जीवित समाज के लक्षण पर चर्चा की गई। शिविर में स्वयंसेवकों को छात्र धर्म संस्कृति, मर्यादा, अनुशासन, ईमानदारी, भाइचारे की भावना एवं क्षत्रिय धर्म संस्कारों को जीवन में उतारने का अभ्यास कराया जा रहा है।