प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करते समय अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना बहुत जरूरी है। अनेक लोग दूसरों की असफलताओं के उदाहरण से हमें भ्रमित और निरुत्साहित करने का प्रयास करते हैं, पर हमें अपने संकल्प को बनाये रखना है। अपनी मेहनत से सभी प्रकार की प्रतिकूलताओं के बाद भी हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आपकी पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, यदि आप सही तरीके से तैयारी करते है तो आपकी सफलता निश्चित है। यह बात बाड़मेर में चल रहे उच्च प्रशिक्षण शिविर के दसवें दिन वरिष्ठ आरएएस महेन्द्र प्रताप सिंह गिराब ने शिविरार्थियों से कही। इसके बाद उन्होंने शिविरार्थियों के प्रश्नों का जवाब देते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। इससे पूर्व प्रातःकाल प्रभात संदेश में संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर ने कहा कि शिविर का यह दसवां दिन है। अब तक हमने जो सीखा है, जाना है, अब उसका मूल्यांकन करने का समय है। मूल्यांकन कोई और नहीं करेगा, आपको स्वयं करना है। आपने यहां दिए गए निर्देशों का पालन कितनी ईमानदारी से और निष्ठा से किया है, इसका परीक्षण करना है। संघ अपने में संपूर्ण योग मार्ग है। यहां के कार्यक्रमों में अष्टांग योग क्रमिक रूप में समाविष्ट है। कुछ लोग कहते है कि हमें ध्यान की प्रक्रिया बताइए। वे यह भूल जाते हैं कि ध्यान तो योग के क्रम में सातवीं अवस्था है, उससे पहले यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार और धारणा का भी प्रावधान है। आजकल कई लोग अपने यहां ध्यान का प्रशिक्षण देते है, वे यह भी नहीं जानते कि ध्यान कोई प्रक्रिया नहीं अवस्था है। प्रक्रिया तो धारणा है। जो लोग यम-नियम आदि का अभ्यास किए बिना ध्यान की बात करते हैं, वे पाखण्डी है। अतः हम भी ध्यान रखें कि कहीं पाखण्डी न बन जाएं, संघ के निर्देशों का पालन करते हुए क्रमिक रूप से आगे बढ़ते रहें तो योग स्वाभाविक रूप से घटित होगा।
बाड़मेर. शिविर को संबोधित करते आरएएस महेंद्रप्रताप सिंह गिराब।
भास्कर संवाददाता | बाड़मेर
प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करते समय अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना बहुत जरूरी है। अनेक लोग दूसरों की असफलताओं के उदाहरण से हमें भ्रमित और निरुत्साहित करने का प्रयास करते हैं, पर हमें अपने संकल्प को बनाये रखना है। अपनी मेहनत से सभी प्रकार की प्रतिकूलताओं के बाद भी हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आपकी पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, यदि आप सही तरीके से तैयारी करते है तो आपकी सफलता निश्चित है। यह बात बाड़मेर में चल रहे उच्च प्रशिक्षण शिविर के दसवें दिन वरिष्ठ आरएएस महेन्द्र प्रताप सिंह गिराब ने शिविरार्थियों से कही। इसके बाद उन्होंने शिविरार्थियों के प्रश्नों का जवाब देते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। इससे पूर्व प्रातःकाल प्रभात संदेश में संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर ने कहा कि शिविर का यह दसवां दिन है। अब तक हमने जो सीखा है, जाना है, अब उसका मूल्यांकन करने का समय है। मूल्यांकन कोई और नहीं करेगा, आपको स्वयं करना है। आपने यहां दिए गए निर्देशों का पालन कितनी ईमानदारी से और निष्ठा से किया है, इसका परीक्षण करना है। संघ अपने में संपूर्ण योग मार्ग है। यहां के कार्यक्रमों में अष्टांग योग क्रमिक रूप में समाविष्ट है। कुछ लोग कहते है कि हमें ध्यान की प्रक्रिया बताइए। वे यह भूल जाते हैं कि ध्यान तो योग के क्रम में सातवीं अवस्था है, उससे पहले यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार और धारणा का भी प्रावधान है। आजकल कई लोग अपने यहां ध्यान का प्रशिक्षण देते है, वे यह भी नहीं जानते कि ध्यान कोई प्रक्रिया नहीं अवस्था है। प्रक्रिया तो धारणा है। जो लोग यम-नियम आदि का अभ्यास किए बिना ध्यान की बात करते हैं, वे पाखण्डी है। अतः हम भी ध्यान रखें कि कहीं पाखण्डी न बन जाएं, संघ के निर्देशों का पालन करते हुए क्रमिक रूप से आगे बढ़ते रहें तो योग स्वाभाविक रूप से घटित होगा।